नई दिल्ली। दूरसंचार नियामक भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने कॉल मैनेजमेंट ऐप और अनचाही कॉल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ट्राई ने केंद्र सरकार से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत अधिकृत एजेंसी का दर्जा देने की मांग की है। यदि ट्राई को यह अधिकार मिल जाता है तो वह ट्रूकॉलर जैसे कॉल मैनेजमेंट ऐप के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम हो सकेगा।
यह मामला 1600 नंबर सीरीज से आने वाली कॉल को लेकर शुरू हुआ है। ट्राई का कहना है कि इस सीरीज के नंबरों से आने वाली कॉल को कोई भी कॉल ब्लॉकिंग या मैनेजमेंट ऐप ब्लॉक नहीं कर सकता है। इन नंबरों का इस्तेमाल नियामकीय संस्थाओं, बैंकों और सरकारी एजेंसियों द्वारा नागरिकों से जरूरी संपर्क के लिए किया जाता है।
ट्राई ने स्पष्ट किया है कि 1600 नंबर सीरीज को खास उद्देश्य के लिए जारी किया गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को सरकारी सेवाओं, वित्तीय संस्थानों और अन्य जरूरी संस्थाओं से आने वाली महत्वपूर्ण कॉल आसानी से मिल सकें। यदि ऐसी कॉल को ऐप के जरिए ब्लॉक किया जाता है तो लोगों को जरूरी सूचनाएं मिलने में परेशानी हो सकती है।
इस मुद्दे पर ट्राई और कॉल मैनेजमेंट ऐप ट्रूकॉलर के बीच विवाद सामने आया है। ट्रूकॉलर जैसे ऐप कॉल की पहचान और अनचाही कॉल से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। यूजर्स इन ऐप के जरिए संदिग्ध या स्पैम कॉल को पहचानने और ब्लॉक करने की सुविधा लेते हैं। लेकिन ट्राई का कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण नंबर सीरीज को ब्लॉक करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
ट्राई ने कहा कि 1600 नंबर सीरीज से आने वाली कॉल को ब्लॉक करने का अधिकार किसी निजी ऐप के पास नहीं होना चाहिए। इसके लिए नियामकीय व्यवस्था का पालन जरूरी है। इसी कारण ट्राई ने सरकार से आईटी एक्ट के तहत अधिकृत एजेंसी का दर्जा मांगा है, ताकि वह ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर सके।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला तकनीकी और अधिकार क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसमें यह तय करना जरूरी है कि किस संस्था के पास किस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार होगा।
TRAI लंबे समय से स्पैम कॉल और मैसेज पर नियंत्रण के लिए काम कर रहा है। नियामक ने अनचाही कॉल और फर्जी संदेशों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। DND यानी डू नॉट डिस्टर्ब सेवा भी इसी प्रयास का हिस्सा है, जिसके माध्यम से ग्राहक प्रचार संबंधी कॉल और मैसेज को नियंत्रित कर सकते हैं।
हालांकि, ट्राई का कहना है कि सभी कॉल एक जैसी नहीं होतीं। कुछ कॉल सरकारी सेवाओं, बैंकिंग और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़ी होती हैं। इसलिए 1600 नंबर सीरीज जैसी विशेष श्रेणी की कॉल को ब्लॉक करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अब नजर सरकार के फैसले पर है। यदि ट्राई को आईटी एक्ट के तहत अधिकृत एजेंसी का दर्जा मिलता है तो कॉल मैनेजमेंट ऐप और टेलीकॉम कंपनियों से जुड़े नियमों को लागू करने में उसे अधिक अधिकार मिल सकते हैं। इससे भविष्य में स्पैम कॉल नियंत्रण और जरूरी कॉल की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।