Technological प्रौद्योगिकीय : भारत में लग्जरी कारों की कीमतों में आने वाले समय में बड़ी राहत देखने को मिल सकती है। इसका कारण भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) है, जो 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाला है। इस समझौते के लागू होने के बाद ब्रिटेन से आयात होने वाली लग्जरी कारों पर लगने वाले भारी आयात शुल्क में धीरे-धीरे कमी आएगी, जिससे इन गाड़ियों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आने की संभावना है।

वर्तमान में भारत में इंपोर्टेड लग्जरी कारों पर करीब 110 प्रतिशत तक ड्यूटी लगती है, जिसके चलते इनकी कीमतें काफी अधिक हो जाती हैं। लेकिन FTA के तहत यह शुल्क आने वाले वर्षों में घटकर लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इस बदलाव का सीधा असर भारतीय ग्राहकों पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें वही लग्जरी कारें पहले की तुलना में काफी कम कीमत में उपलब्ध हो सकेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत का ऑटोमोबाइल बाजार और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। ब्रिटिश कंपनियों को भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिलेगा, वहीं भारतीय उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के अधिक विकल्प और बेहतर कीमतें मिलेंगी।

लग्जरी कार सेगमेंट में पहले से ही कई विदेशी कंपनियां भारत में मौजूद हैं, लेकिन ऊंची ड्यूटी के कारण उनकी बिक्री सीमित रहती है। अब ड्यूटी में संभावित कटौती के बाद इस सेगमेंट में मांग बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल ग्राहकों को फायदा होगा, बल्कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शुल्क कटौती तुरंत नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। अगले पांच वर्षों में धीरे-धीरे टैक्स घटाकर इसे 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा, जिससे बाजार में अचानक बदलाव की बजाय स्थिर विकास देखने को मिलेगा।

ऑटो सेक्टर के जानकारों का कहना है कि यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंध मजबूत होंगे और ऑटोमोबाइल उद्योग को नई दिशा मिलेगी।

ग्राहकों के लिए यह एक बड़ा अवसर माना जा रहा है, खासकर उनके लिए जो लंबे समय से लग्जरी कार खरीदने का सपना देख रहे हैं। कीमतों में संभावित गिरावट से प्रीमियम कारों की पहुंच एक बड़े उपभोक्ता वर्ग तक हो सकती है।

कुल मिलाकर, भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से आने वाले वर्षों में लग्जरी कार बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कीमतों में गिरावट और बढ़ते विकल्प इस सेक्टर को और अधिक गतिशील बना सकते हैं।


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