नई दिल्ली। दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार चीन तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ बढ़ रहा है। अगस्त 2026 के कार बिक्री आंकड़ों ने इस बदलाव की एक और बड़ी तस्वीर सामने रखी है। चीन की सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप-10 पैसेंजर कारों की सूची में कोई भी पारंपरिक प्योर पेट्रोल कार जगह नहीं बना सकी। पूरी टॉप-10 लिस्ट इलेक्ट्रिफाइड मॉडल्स यानी बैटरी इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड गाड़ियों के कब्जे में रही।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ साल पहले तक दुनिया के ज्यादातर बड़े बाजारों में पेट्रोल और डीजल कारों का दबदबा था। अब चीन में इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड गाड़ियां न सिर्फ विकल्प बन चुकी हैं बल्कि कई सेगमेंट में बिक्री चार्ट पर सबसे आगे दिखाई दे रही हैं।
अगस्त के आंकड़ों में Geely की इलेक्ट्रिक कार Xingyuan, जिसे कुछ निर्यात बाजारों में EX2 नाम से जाना जाता है, सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडलों में शीर्ष पर रही। इसके अलावा BYD, Tesla और अन्य चीनी कंपनियों के इलेक्ट्रिफाइड मॉडल्स ने भी टॉप सेलिंग लिस्ट में मजबूत जगह बनाई।
टॉप-10 में नहीं मिली प्योर पेट्रोल कार को जगह
चीन के अगस्त 2026 बिक्री चार्ट की सबसे खास बात यही रही कि टॉप-10 में कोई pure petrol मॉडल नहीं था। इसका मतलब यह नहीं है कि चीन में पेट्रोल कारों की बिक्री बंद हो गई है। पेट्रोल इंजन वाली लाखों गाड़ियां अभी भी वहां बिक रही हैं, लेकिन सबसे ज्यादा बिकने वाले चुनिंदा मॉडलों में इलेक्ट्रिफाइड गाड़ियों का दबदबा बेहद स्पष्ट हो गया है।
यह अंतर समझना जरूरी है। इलेक्ट्रिफाइड या New Energy Vehicle यानी NEV श्रेणी में सिर्फ पूरी तरह बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक कारें नहीं आतीं। चीन के आंकड़ों में battery electric vehicles के साथ plug-in hybrid जैसी गाड़ियां भी NEV श्रेणी में शामिल होती हैं।
इसलिए टॉप-10 को पूरी तरह “प्योर इलेक्ट्रिक” कहना सही नहीं होगा। सही तस्वीर यह है कि सभी शीर्ष मॉडल इलेक्ट्रिफाइड थे और इनमें बैटरी इलेक्ट्रिक तथा प्लग-इन हाइब्रिड दोनों तरह की तकनीक शामिल थी।
Geely की सस्ती EV ने मारी बाजी
चीन में किफायती इलेक्ट्रिक कारों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। अगस्त में Geely Xingyuan/EX2 ने लगभग 39,651 यूनिट की बिक्री के साथ मजबूत प्रदर्शन किया।
चीन में इलेक्ट्रिक कारों की सफलता के पीछे कम कीमत वाले मॉडल्स की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण कारण है। वहां ग्राहकों के पास छोटी सिटी EV से लेकर बड़ी इलेक्ट्रिक SUV और प्रीमियम सेडान तक बड़ी संख्या में विकल्प मौजूद हैं।
इससे इलेक्ट्रिक कार सिर्फ महंगे या लग्जरी ग्राहकों का विकल्प नहीं रह गई है। बड़ी संख्या में खरीदार रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी EV चुन रहे हैं।
BYD से लेकर Tesla तक जबरदस्त मुकाबला
चीन का EV बाजार दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी ऑटो बाजारों में शामिल हो चुका है। यहां BYD और Geely जैसी घरेलू कंपनियों के अलावा Tesla को भी कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है।
अगस्त 2026 में Tesla ने चीन में करीब 50 हजार कारों की रिटेल बिक्री की। इसके बावजूद कंपनी को स्थानीय कंपनियों से लगातार चुनौती मिल रही है।
BYD, Geely, Leapmotor, Xiaomi और दूसरे चीनी ब्रांड नई तकनीक, लंबी रेंज और आक्रामक कीमतों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं।
इस प्रतिस्पर्धा का सीधा फायदा ग्राहकों को मिलता है। कंपनियां लगातार नई बैटरी टेक्नोलॉजी, फास्ट चार्जिंग और ज्यादा फीचर्स वाली गाड़ियां बाजार में ला रही हैं।
दुनिया का EV पावरहाउस बना चीन
चीन की बढ़त सिर्फ घरेलू बिक्री तक सीमित नहीं है। चीनी कंपनियां तेजी से दूसरे देशों में भी इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड गाड़ियों का निर्यात बढ़ा रही हैं।
अगस्त 2026 में चीन के पैसेंजर व्हीकल एक्सपोर्ट में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई। इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों के निर्यात में भी तेज उछाल देखने को मिला।
चीन में इलेक्ट्रिक कारों के लिए विशाल सप्लाई चेन तैयार हो चुकी है। बैटरी सेल से लेकर मोटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन निर्माण तक स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है।
यही वजह है कि चीनी कंपनियां अलग-अलग कीमतों में इलेक्ट्रिक कारें पेश करने में सक्षम हैं।
अब सवाल भारत का, हम कहां खड़े हैं?
चीन की तुलना में भारत का इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार बाजार अभी शुरुआती विस्तार के चरण में है। हालांकि पिछले एक-दो वर्षों में भारत में EV की बिक्री काफी तेजी से बढ़ी है।
अगस्त 2026 में भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल की रिटेल बिक्री लगभग 30,696 यूनिट रही। यह पिछले साल के इसी महीने की तुलना में करीब 52 प्रतिशत अधिक थी।
अगस्त में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल की हिस्सेदारी भारतीय पैसेंजर व्हीकल बाजार में करीब 7 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई। यानी भारत में EV तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन नई कारों की बिक्री में अभी भी पेट्रोल, CNG, डीजल और हाइब्रिड गाड़ियों की बड़ी भूमिका है।
यहां चीन और भारत के बीच साफ अंतर दिखाई देता है।
भारत में पेट्रोल का दबदबा कम जरूर हो रहा
दिलचस्प बात यह है कि भारत में भी तस्वीर तेजी से बदल रही है। अगस्त 2026 में पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी करीब 40.8 प्रतिशत रही। दूसरी तरफ CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक को मिलाकर वैकल्पिक पावरट्रेन वाली कारों की हिस्सेदारी लगभग 41.9 प्रतिशत तक पहुंच गई।
यानी पहली बार इन वैकल्पिक पावरट्रेन ने संयुक्त रूप से पेट्रोल को पीछे छोड़ा।
लेकिन इसे चीन जैसी EV क्रांति समझना गलत होगा। भारत में वैकल्पिक ईंधन की बढ़त में सबसे बड़ा योगदान CNG का है। इसके बाद हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियां आती हैं।
भारत में ग्राहक फिलहाल एक ही टेक्नोलॉजी की तरफ नहीं जा रहे बल्कि पेट्रोल से हटकर CNG, हाइब्रिड और EV जैसे कई विकल्प चुन रहे हैं।
भारत में EV के सामने क्या हैं चुनौतियां?
भारत में इलेक्ट्रिक कारों के तेजी से बढ़ने के बावजूद कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। सबसे महत्वपूर्ण चुनौती कीमत है। पेट्रोल कार के मुकाबले कई इलेक्ट्रिक कारों की शुरुआती कीमत अधिक होती है।
दूसरी चुनौती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की है। बड़े शहरों और प्रमुख हाईवे पर चार्जिंग नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी व्यापक नेटवर्क की जरूरत है।
अपार्टमेंट में रहने वाले ग्राहकों के लिए घर पर चार्जिंग की सुविधा भी कई बार चुनौती बन सकती है।
इसके अलावा लंबी यात्रा के दौरान चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता और चार्जिंग में लगने वाला समय भी ग्राहकों के खरीद निर्णय को प्रभावित करता है।
भारत में तेजी से बढ़ रही इलेक्ट्रिक कारें
इन चुनौतियों के बावजूद भारत में EV की रफ्तार धीमी नहीं कही जा सकती। साल 2025 में भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल की बिक्री 1.76 लाख यूनिट से ज्यादा रही थी और सालाना आधार पर करीब 77 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
2026 में यह गति और तेज हुई है। अगस्त तक इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की बिक्री पहले ही पिछले पूरे साल के स्तर को पार करने की दिशा में मजबूत बढ़त दिखा चुकी है।
Tata Motors के साथ Mahindra, MG, Hyundai और दूसरे वाहन निर्माता इलेक्ट्रिक सेगमेंट में नए मॉडल उतार रहे हैं। आने वाले वर्षों में Maruti Suzuki सहित अन्य कंपनियों के नए उत्पाद भी बाजार का आकार बढ़ा सकते हैं।
चीन से भारत कितना पीछे?
अगर सिर्फ इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों की बाजार हिस्सेदारी देखी जाए तो चीन फिलहाल भारत से कई गुना आगे है। चीन में इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड गाड़ियां मुख्यधारा का हिस्सा बन चुकी हैं, जबकि भारत में pure EV passenger cars की हिस्सेदारी अभी सिंगल डिजिट में है।
हालांकि दोनों देशों के बाजारों की सीधी तुलना करना पूरी तरह उचित नहीं होगा। चीन में बड़े पैमाने पर बैटरी निर्माण, स्थानीय EV सप्लाई चेन, बड़ी संख्या में मॉडल और लंबे समय से चली आ रही सरकारी नीतियों ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ाया है।
भारत का ऑटो बाजार अलग रास्ता अपना रहा है। यहां CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक तीनों तकनीकों की मांग बढ़ रही है।
चीन की अगस्त 2026 की टॉप-10 कारों की सूची फिर भी भविष्य की दिशा जरूर दिखाती है। कभी पेट्रोल कारों के दबदबे वाला दुनिया का सबसे बड़ा ऑटो बाजार अब उस मुकाम पर पहुंच चुका है जहां महीने की दस सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में एक भी पारंपरिक प्योर पेट्रोल मॉडल नहीं है।
भारत में फिलहाल ऐसा बदलाव दूर दिखाई देता है, लेकिन अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि यहां भी पेट्रोल का एकछत्र दबदबा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। EV बिक्री में तेज बढ़ोतरी और नए मॉडल्स की एंट्री के साथ आने वाले कुछ वर्षों में भारतीय ऑटो बाजार की तस्वीर भी काफी बदल सकती है।
**फैक्ट चेक:** भारत में अगस्त 2026 में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल की बिक्री **30,696 यूनिट** रही और सालाना वृद्धि करीब **51.9%** थी। ([ETAuto.com][2]) वहीं पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 40.8% और CNG+EV+हाइब्रिड की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 41.9% रही।
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