नई दिल्ली: बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया की बढ़ती लत को लेकर Meta ने अमेरिकी राज्यों के साथ करीब 18 अरब डॉलर के समझौते को स्वीकार किया है। इसके तहत Instagram और Facebook पर स्क्रीन टाइम, नोटिफिकेशन, उम्र सत्यापन और पैरेंटल कंट्रोल से जुड़े बदलाव किए जाएंगे। Meta को यह रकम अगले 10 वर्षों में चुकानी होगी।

बच्चों की सोशल मीडिया आदत को लेकर Meta पर बड़ा दबाव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram और Facebook चलाने वाली कंपनी Meta को बच्चों और किशोरों से जुड़े मामलों में बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने अमेरिकी राज्यों के साथ करीब 18 अरब डॉलर यानी लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक समझौते को स्वीकार किया है। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि Meta के प्लेटफॉर्म में मौजूद कुछ फीचर्स और एल्गोरिदम बच्चों तथा किशोरों को बार-बार ऐप इस्तेमाल करने और लंबे समय तक स्क्रीन पर बने रहने के लिए प्रेरित करते हैं।
अमेरिकी राज्यों की ओर से लगाए गए आरोपों में कहा गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के डिजाइन और कुछ फीचर्स का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, नींद और व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। अब प्रस्तावित समझौते के तहत Meta को भारी रकम चुकाने के साथ-साथ अपने प्लेटफॉर्म के काम करने के तरीके में भी कई बदलाव करने होंगे।
Instagram और Facebook पर क्या-क्या बदलेगा
समझौते का सीधा असर 18 साल से कम उम्र के यूजर्स पर पड़ने की बात कही गई है। इसके तहत किशोरों के लिए रोजाना दो घंटे की डिफॉल्ट समय सीमा तय करने का प्रावधान बताया गया है। यदि कोई किशोर इससे अधिक समय तक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहता है, तो इसके लिए माता-पिता की मंजूरी की जरूरत होगी।
इसके अलावा स्कूल के समय आने वाले पुश नोटिफिकेशन को बंद करने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि पढ़ाई के दौरान बार-बार आने वाले मोबाइल नोटिफिकेशन बच्चों का ध्यान न भटकाएं और वे लगातार सोशल मीडिया चेक करने के लिए प्रेरित न हों।
Meta को उम्र सत्यापन की प्रक्रिया भी ज्यादा सख्त करनी होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कम उम्र के यूजर्स अपनी वास्तविक उम्र छिपाकर ऐसा कंटेंट न देख सकें, जो उनके लिए उपयुक्त नहीं है।
माता-पिता के लिए भी ज्यादा मजबूत पैरेंटल कंट्रोल उपलब्ध कराने की योजना है। इससे अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों और सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बेहतर निगरानी रखने में मदद मिल सकती है।
Meta 10 साल में चुकाएगी 18 अरब डॉलर
इस समझौते के तहत Meta को पूरी रकम एक साथ नहीं देनी होगी। कंपनी करीब 18 अरब डॉलर की राशि अगले 10 वर्षों में किस्तों के रूप में चुकाएगी। इस रकम का एक बड़ा हिस्सा कैलिफोर्निया को मिलने की उम्मीद है, जबकि दूसरे अमेरिकी राज्यों को भी बड़ी राशि प्राप्त होगी।
समझौते से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल केवल सरकारी खजाने तक सीमित रखने की बात नहीं है। इन पैसों का उपयोग बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, डिजिटल साक्षरता बढ़ाने, स्कूल के बाद की गतिविधियों और समर कैंप जैसी योजनाओं में किया जा सकता है।
अमेरिकी राज्यों का मानना है कि बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के लिए केवल प्लेटफॉर्म पर नियम लागू करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों में निवेश भी जरूरी है।
TikTok और YouTube पर भी बढ़ सकता है दबाव
Meta के साथ हुए इस समझौते का असर दूसरी सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म कंपनियों पर भी पड़ सकता है। Meta का तर्क है कि अगर Instagram और Facebook पर बच्चों के लिए सख्त नियम लागू किए जाते हैं, लेकिन TikTok और YouTube जैसे अन्य प्लेटफॉर्म पर समान व्यवस्था नहीं होती, तो बच्चों की सुरक्षा का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकेगा। यही वजह है कि इस मामले को सोशल मीडिया इंडस्ट्री के लिए व्यापक प्रभाव वाला माना जा रहा है। यदि इस तरह के सुरक्षा मानक दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी लागू होते हैं, तो आने वाले समय में बच्चों और किशोरों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल के नियम और सख्त हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि Meta के मामले में अपनाया गया मॉडल आगे चलकर दूसरी बड़ी टेक कंपनियों के लिए भी मिसाल बन सकता है। इससे कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म के डिजाइन, एल्गोरिदम और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े फीचर्स पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
क्या सिर्फ स्क्रीन टाइम कम करने से समस्या खत्म होगी?
हालांकि समझौते के बाद कई बदलाव प्रस्तावित हैं, लेकिन बाल अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच इसे लेकर सवाल भी हैं। उनका मानना है कि केवल बच्चों के स्क्रीन टाइम पर सीमा लगाने से सोशल मीडिया से जुड़ी सभी समस्याएं खत्म नहीं होंगी। सबसे बड़ी चुनौती प्लेटफॉर्म के उन एल्गोरिदम और डिजाइन को लेकर है, जो यूजर्स का ध्यान ज्यादा समय तक बनाए रखने के लिए तैयार किए जाते हैं। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Meta अपने प्लेटफॉर्म के मूल डिजाइन और बच्चों को प्रभावित करने वाले फीचर्स में कितने व्यापक बदलाव करती है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार किसी बड़ी सोशल मीडिया कंपनी पर बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े आरोपों के बाद इतनी बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी और प्लेटफॉर्म में व्यापक बदलाव की बात सामने आई है।
अगर यह समझौता लागू होता है, तो इसका असर केवल Meta के Instagram और Facebook तक सीमित नहीं रह सकता। बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर दुनियाभर में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नए नियम और मानक तय करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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