नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की चोट और फिटनेस को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख और पूर्व क्रिकेटर VVS लक्ष्मण ने संस्था का जोरदार बचाव किया है। लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों के मैदान पर वापसी में होने वाली देरी के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि क्रिकेटर मशीन नहीं होते कि किसी तय समयसीमा के मुताबिक उनकी रिकवरी हर बार पूरी तरह हो जाए।
लक्ष्मण के मुताबिक, किसी खिलाड़ी की चोट से उबरने की प्रक्रिया कई कारकों पर निर्भर करती है। शरीर की प्रतिक्रिया, चोट की गंभीरता, रिहैबिलिटेशन के दौरान प्रगति और खिलाड़ी की मैच फिटनेस जैसे पहलू यह तय करते हैं कि वह कब तक मैदान पर वापसी कर पाएगा। इसलिए हर खिलाड़ी के लिए पहले से तय की गई समयसीमा को अंतिम मानना व्यावहारिक नहीं है।
CoE सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं
VVS लक्ष्मण ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका केवल चोटिल खिलाड़ियों को ठीक करने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य क्रिकेटरों को उनकी क्षमता के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना भी है। उन्होंने कहा कि संस्था खिलाड़ियों की फिटनेस, प्रदर्शन और लंबे समय तक उच्च स्तर पर खेलने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम करती है।
लक्ष्मण ने चोटों के मामले में ‘दोष’ जैसे शब्द के इस्तेमाल से भी असहमति जताई। उनके मुताबिक, इस तरह की भाषा किसी एक संस्था या व्यक्ति को बलि का बकरा बनाने जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। उनका कहना था कि खिलाड़ी की रिकवरी में कई पक्ष शामिल होते हैं और सभी का उद्देश्य उसे पूरी तरह फिट करके मैदान पर वापस भेजना होता है।
टीम मैनेजमेंट से बेहतर तालमेल
CoE प्रमुख ने सेंटर और भारतीय टीम मैनेजमेंट के बीच तालमेल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पुरुष और महिला दोनों टीमों के मैनेजमेंट तथा उनके स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसिन (SSM) स्टाफ के साथ CoE का बेहतर समन्वय है।
लक्ष्मण के अनुसार, खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बातचीत लगातार होती रहती है और यह प्रक्रिया सुचारु तरीके से आगे बढ़ रही है। टीम मैनेजमेंट, मेडिकल टीम और CoE के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान होने से खिलाड़ियों की रिकवरी की स्थिति पर नजर रखी जाती है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खिलाड़ी की फिटनेस को लेकर अंतिम फैसला जल्दबाजी में नहीं किया जा सकता। किसी खिलाड़ी को केवल इसलिए मैदान पर नहीं उतारा जा सकता कि उसकी अनुमानित रिकवरी अवधि पूरी हो गई है। उसकी वास्तविक फिटनेस और मैच के लिए तैयार होने की स्थिति अधिक महत्वपूर्ण है।
कई बड़े खिलाड़ी CoE में कर रहे रिकवरी
इस समय भारतीय क्रिकेट के कई महत्वपूर्ण खिलाड़ी अपनी-अपनी चोटों से उबरने के लिए CoE में हैं। इनमें तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, ऑलराउंडर हर्षित राणा, हार्दिक पांड्या और वॉशिंगटन सुंदर के अलावा शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बी साई सुदर्शन का नाम शामिल है।
इन खिलाड़ियों की फिटनेस भारतीय टीम के लिए काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनकी चोट और वापसी की प्रक्रिया पर लगातार नजर बनी हुई है। खासकर बुमराह जैसे प्रमुख तेज गेंदबाज की फिटनेस टीम की गेंदबाजी रणनीति के लिहाज से अहम मानी जाती है।
इसी तरह हार्दिक पांड्या और वॉशिंगटन सुंदर जैसे ऑलराउंडरों की उपलब्धता टीम के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में CoE के लिए खिलाड़ियों को जल्दबाजी के बजाय पूरी तरह फिट करने पर जोर देना जरूरी है।
तय समय पर फिट होना जरूरी नहीं
लक्ष्मण ने इंसानी शरीर की जटिलता का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी खिलाड़ी के लिए निर्धारित समयसीमा में पूरी तरह फिट होना हमेशा संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को मशीन की तरह नहीं देखा जा सकता।
हर चोट का असर अलग होता है और हर खिलाड़ी का शरीर रिहैबिलिटेशन के प्रति अलग तरीके से प्रतिक्रिया करता है। ऐसे में मेडिकल टीम द्वारा बताई गई अनुमानित समयसीमा बदल भी सकती है। यदि किसी खिलाड़ी को अतिरिक्त समय की जरूरत है तो उसे मैदान पर उतारने के बजाय रिकवरी पूरी होने तक इंतजार करना ज्यादा उचित है।
फिटनेस टेस्ट के बाद ही वापसी
भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर मानक काफी कड़े किए गए हैं। चोट से उबरने के बाद खिलाड़ी को केवल दर्द कम होने के आधार पर मैच खेलने की अनुमति नहीं दी जाती। उसे फिटनेस और प्रदर्शन से जुड़े कई मानकों पर खरा उतरना होता है।
लक्ष्मण के मुताबिक, इन प्रक्रियाओं का मकसद खिलाड़ियों को लंबे समय तक उपलब्ध रखना और दोबारा चोटिल होने की संभावना कम करना है। यदि कोई खिलाड़ी पूरी तरह तैयार नहीं है और जल्दबाजी में मैदान पर लौटता है तो उसकी चोट और गंभीर हो सकती है। इससे टीम और खिलाड़ी दोनों को नुकसान हो सकता है।
खिलाड़ियों की दीर्घकालिक फिटनेस पर जोर
CoE की भूमिका को लेकर लक्ष्मण का बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की चोट और उनकी वापसी को लेकर चर्चा लगातार बनी हुई है। लगातार बढ़ते क्रिकेट कार्यक्रम के कारण खिलाड़ियों पर काम का दबाव भी बढ़ा है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भी खिलाड़ियों की भागीदारी रहती है। ऐसे में उनकी फिटनेस और रिकवरी का प्रबंधन पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। CoE का उद्देश्य इसी चुनौती के बीच खिलाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से तैयार करना है।
लक्ष्मण ने संकेत दिया कि संस्था का लक्ष्य केवल खिलाड़ी को अगली सीरीज के लिए उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसे लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए तैयार करना है। इसके लिए जरूरत पड़ने पर रिकवरी में अतिरिक्त समय देना भी प्रक्रिया का हिस्सा है।
किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं
VVS लक्ष्मण ने स्पष्ट संदेश दिया कि चोट से वापसी एक सामूहिक प्रक्रिया है। इसमें खिलाड़ी, मेडिकल टीम, फिटनेस विशेषज्ञ, टीम मैनेजमेंट और CoE सभी की भूमिका होती है। इसलिए किसी खिलाड़ी की वापसी में देरी होने पर किसी एक संस्था को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
उन्होंने CoE और टीम मैनेजमेंट के बीच बेहतर तालमेल का हवाला देते हुए कहा कि सभी पक्षों के बीच संवाद लगातार जारी है। खिलाड़ियों की स्थिति के आधार पर ही उनकी वापसी का फैसला किया जाता है।
लक्ष्मण का कहना है कि भारतीय क्रिकेट का लक्ष्य खिलाड़ियों को जल्दबाजी में मैदान पर उतारना नहीं, बल्कि पूरी तरह तैयार और सुरक्षित स्थिति में वापस लाना है। ऐसे में रिकवरी की तय समयसीमा से ज्यादा महत्व खिलाड़ी की वास्तविक फिटनेस को दिया जाना चाहिए। यही दृष्टिकोण लंबे समय में भारतीय टीम को चोटों से होने वाले नुकसान को कम करने और खिलाड़ियों के करियर को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद कर सकता है।