अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित 'ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026' में भारत की प्राचीन खेल परंपराओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बनाई। एक दिवसीय आयोजन में भारत के योगासन और मल्लखंब प्रदर्शन ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं चीन के वुशु, कजाकिस्तान के तोगिजकुमालक और ब्राजील के जिउ-जित्सु ने भी खेलों के माध्यम से विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। सोमवार, 12 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों के लगभग 160 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।अहमदाबाद के नारनपुरा स्थित वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक और स्वदेशी खेलों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना था। इसमें विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने अपनी खेल कलाओं और पारंपरिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। आयोजन के दौरान खेल कौशल के साथ सांस्कृतिक विविधता और आपसी सहयोग का संदेश भी दिया गया।
भारत के मल्लखंब और योगासन ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम में भारत की ओर से योगासन, मल्लखंब और कलारीपयट्टू का प्रदर्शन किया गया। मल्लखंब में खिलाड़ियों ने खंभे के सहारे संतुलन, ताकत और लचीलेपन का शानदार प्रदर्शन किया।इस पारंपरिक खेल में खिलाड़ियों को शरीर पर नियंत्रण रखते हुए कठिन मुद्राएं बनानी होती हैं। मल्लखंब का प्रदर्शन भारतीय खेल परंपराओं की विशेषताओं को सामने लाने वाला रहा।इसके अलावा योगासन के दौरान खिलाड़ियों ने विभिन्न योग मुद्राओं का प्रदर्शन किया। इसमें शरीर का संतुलन, लचीलापन और एकाग्रता प्रमुख आकर्षण रहे।भारत की प्राचीन युद्धकला कलारीपयट्टू का प्रदर्शन भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
चीन का वुशु और ब्राजील का जिउ-जित्सु
ब्रिक्स आयोजन में चीन ने अपनी पारंपरिक मार्शल आर्ट वुशु का प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों ने तेज गति, संतुलन और तकनीकी कौशल के माध्यम से अपनी कला प्रस्तुत की।वहीं ब्राजील के खिलाड़ियों ने जिउ-जित्सु का प्रदर्शन किया। इस युद्धकला में तकनीक, नियंत्रण और प्रतिद्वंद्वी की गतिविधियों को समझने का विशेष महत्व होता है।कजाकिस्तान की ओर से पारंपरिक रणनीतिक खेल तोगिजकुमालक प्रस्तुत किया गया। यह खेल मानसिक गणना, धैर्य और रणनीतिक सोच पर आधारित है।अलग-अलग देशों के इन खेलों ने दर्शाया कि पारंपरिक खेल केवल शारीरिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें मानसिक दक्षता और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
योगासन के प्रति दिखा सभी देशों का आकर्षण
आयोजन की एक खास बात विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की योगासन में दिलचस्पी रही।भारत में प्राचीन काल से प्रचलित योग अब दुनिया के अनेक देशों में लोकप्रिय है। स्वास्थ्य, शारीरिक संतुलन, लचीलेपन और मानसिक एकाग्रता के लिए योग का अभ्यास किया जाता है।ब्रिक्स आयोजन में भी योगासन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया। दक्षिण अफ्रीका सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने योग के महत्व को स्वीकार किया।इस दौरान यह संदेश भी सामने आया कि पारंपरिक खेल विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद और सहयोग का माध्यम बन सकते हैं।
विश्व योगासन चैंपियनशिप में शामिल हुए थे 79 देश
अहमदाबाद इससे पहले जून 2026 में पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप की मेजबानी कर चुका है।इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 79 देशों के कुल 522 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। प्रतियोगिता में 31 देशों के खिलाड़ियों ने कम से कम एक पदक हासिल किया।भारतीय खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 114 पदक जीते थे। इनमें 102 स्वर्ण पदक शामिल थे।इस आयोजन ने योगासन को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अफ्रीकी देशों के खिलाड़ियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही।
खेल मंत्री ने दिया पारंपरिक खेलों के संरक्षण का संदेश
केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ब्रिक्स आयोजन के दौरान पारंपरिक और स्वदेशी खेलों के संरक्षण पर जोर दिया।उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच पारंपरिक खेलों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए एक संयुक्त संग्रह तैयार करने का सुझाव दिया।इसमें खेलों के इतिहास, नियमों, उपकरणों और तकनीकों की जानकारी को संरक्षित करने की बात कही गई।खेल मंत्री ने कहा कि पारंपरिक खेल युवाओं के विकास, सांस्कृतिक समझ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा अहमदाबाद
अहमदाबाद को 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिली है। इसके अलावा शहर 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की भारत की संभावित दावेदारी के केंद्र में भी है।ऐसे में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के माध्यम से शहर अपनी खेल सुविधाओं और आयोजन क्षमता को प्रदर्शित कर रहा है।ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 ने भारत के योगासन, मल्लखंब और कलारीपयट्टू जैसे खेलों को वैश्विक मंच प्रदान किया।कार्यक्रम में शामिल देशों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े खेल प्रस्तुत किए और आपसी सहयोग का संदेश दिया। यह आयोजन पारंपरिक खेलों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास रहा।