पारण का शुभ समय निकल जाए तो कब तोड़ें व्रत जानें एकादशी का जरूरी नियम
परिवर्तिनी एकादशी पारण के नियम
धर्म डेस्क : भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 22 सितंबर 2026 को रखा गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा के दौरान करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी कहा जाता है। व्रत का पारण अगले दिन यानी 23 सितंबर बुधवार को द्वादशी तिथि में किया जाता है।
पारण के समय को लेकर अलग-अलग शहरों के पंचांग में कुछ अंतर हो सकता है, क्योंकि इसकी गणना स्थानीय सूर्योदय के आधार पर होती है। उदाहरण के लिए दिल्ली के लिए एक पंचांग में 23 सितंबर को सुबह 6:13 बजे से 10:23 बजे तक पारण का समय दिया गया है।
शुभ समय निकल जाए तो कब खोलें व्रत?
एकादशी व्रत के नियमों के अनुसार पारण द्वादशी तिथि के भीतर करना चाहिए। सामान्य रूप से सुबह का समय पारण के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। अगर किसी कारण से सुबह निर्धारित पारण अवधि में व्रत नहीं खोल पाए तो धार्मिक नियमों के अनुसार मध्याह्न में पारण करने से बचना चाहिए और मध्याह्न बीतने के बाद पारण किया जा सकता है, लेकिन द्वादशी समाप्त होने से पहले व्रत खोलना चाहिए। 2026 में द्वादशी तिथि 23 सितंबर की रात करीब 10:50 बजे समाप्त होने की जानकारी दी गई है। हालांकि स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
हरि वासर में न करें पारण
एकादशी व्रत में हरि वासर का विशेष महत्व है। यह द्वादशी तिथि का शुरुआती एक-चौथाई हिस्सा माना जाता है। धार्मिक नियमों के मुताबिक हरि वासर समाप्त होने से पहले व्रत नहीं खोलना चाहिए। पारण के लिए हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करने की परंपरा है।
ऐसे करें पारण
पारण के दिन सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान को भोग लगाएं और अपनी परंपरा के अनुसार दान-दक्षिणा करें। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत पूरा किया जा सकता है। पारण का सही समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग का समय देखना बेहतर है। परिवर्तिनी एकादशी को वामन एकादशी और पार्श्व एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता में यह व्रत भगवान विष्णु और उनके वामन स्वरूप की आराधना से जुड़ा है।