Vinayak Chaturthi 2025: विनायक चतुर्थी कल, इस शुभ मुहूर्त पर करें गणपति बप्पा की पूजा, दूर होंगे सारे संकट

Update: 2025-09-24 03:34 GMT
Vinayak Chaturthi 2025: हिंदू धर्म में, प्रत्येक माह में दो चतुर्थी तिथियाँ होती हैं: एक कृष्ण पक्ष (अंधकार पक्ष) में, जिसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं, और दूसरी शुक्ल पक्ष (उज्जवल पक्ष) में, जिसे विनायक चतुर्थी कहते हैं। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं।
विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और तिथि:
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 25 सितंबर, 2025, सुबह 7:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 26 सितंबर, 2025, सुबह 9:33 बजे
पूजा का सर्वोत्तम समय: 25 सितंबर का पूरा दिन शुभ माना जाता है, विशेष रूप से सुबह और शाम का समय गणेश पूजा के लिए सर्वोत्तम है।
इस दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि चतुर्थी तिथि पर चंद्रमा के दर्शन करने से सौभाग्य और पुण्य की प्राप्ति होती है।
विनायक चतुर्थी पूजा विधि:
विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद, पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। लाल कपड़े से ढके एक पाटे पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें। गणेश जी को रोली, चावल, दूर्वा और सिंदूर अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ। गणेश चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।
पूजा के विशेष लाभ:
कष्टों से मुक्ति: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। इस दिन सच्चे मन से उनकी पूजा करने से जीवन के सभी दुख और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति: गणपति बप्पा बुद्धि के देवता हैं। उनकी पूजा विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए लाभकारी होती है और एकाग्रता बढ़ाती है।
सुख और समृद्धि: विनायक चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
विनायक चतुर्थी को संकट चतुर्थी भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। विशेष रूप से विवाहित महिलाएँ अपने परिवार की खुशहाली और संतान की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं।
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