Vat Savitri 2025: वट सावित्री पर करें ये उपाय, मिलेगा पति की लंबी उम्र और तरक्की का आशीर्वाद
Vat Savitri 2025: वट सावित्री हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जिसे हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, तरक्की, अच्छी सेहत और सुखी जीवन के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। इस दिन मुख्य रूप से सुहागिनें वट वृक्ष की उपासना करती है। इसके अलावा वृक्ष की परिक्रमा करते हुए सावित्री की कथा का पाठ भी करती हैं। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को स्त्री के त्याग, प्रेम और सहनशक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस साल 26 मई 2025 को वट सावित्री का व्रत रखा जाएगा। इस तिथि पर भरणी नक्षत्र बन रहा है, जो सुबह 8:23 मिनट तक रहेगा। वहीं इस दिन शोभन व अतिगण्ड योग का संयोग बना रहेगा। इस योग में कुछ खास उपाय करने से अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए इनके बारे में जानते हैं।
वट सावित्री पर करें ये उपाय:
वट सावित्री व्रत के दिन पुरुष पीपल और महिलाएं वट वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करें। इस दौरान लाल रंग का कच्चा सूत पेड़ पर अवश्य लपेंटे। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता और रिश्तों में प्रेम-विश्वास का संचार होता है।
ज्योतिषियों के मुताबिक वट सावित्री के पर्व पर जरूरतमंदों को बेल के वृक्ष के नीचे खीर का भोजन कराएं। इससे पति की दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस दिन आप बरगद के पत्ते पर स्वास्तिक बनाएं। इसके बाद इसपर साबुत चावल के साथ एक सुपारी रखें। इसके बाद धन की देवी लक्ष्मी को इसे अर्पित करें। मान्यता है कि ऐसा करने पर घर की आर्थिक स्थिति में सुधार और बरकत होती है।
इस दिन शनि महाराज के इस मंत्र का जप करते हुए ऊँ श्रीं शं श्रीं शनैश्चराय नम: एक मुठ्ठी साबुत उड़द की दाल का दान करें। इससे कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
वट सावित्री के दिन विधि-विधान से महिलाएं पूजा करें और व्रत रखें। इसके बाद चंद्र देव को दूध से अर्घ्य दें। इससे जीवन में शांति बनी रहती है।
वट सावित्री पर मां लक्ष्मी को 11 कौड़ियां अर्पित करें। मान्यता है कि इससे पति की तरक्की और धन लाभ के योग बनते हैं।
वट सावित्री व्रत की आरती:
अश्वपती पुसता झाला।। नारद सागंताती तयाला।।
अल्पायुषी स त्यवंत।। सावित्री ने कां प्रणीला।।
आणखी वर वरी बाळे।।मनी निश्चय जो केला।।
आरती वडराजा।।
दयावंत यमदूजा। सत्यवंत ही सावित्री।
भावे करीन मी पूजा। आरती वडराजा ।।
ज्येष्ठमास त्रयोदशी। करिती पूजन वडाशी ।।
त्रिरात व्रत करूनीया। जिंकी तू सत्यवंताशी।
आरती वडराजा ।।
स्वर्गावारी जाऊनिया। अग्निखांब कचळीला।।
धर्मराजा उचकला। हत्या घालिल जीवाला।
येश्र गे पतिव्रते। पती नेई गे आपुला।।
आरती वडराजा ।।
जाऊनिया यमापाशी। मागतसे आपुला पती।
चारी वर देऊनिया। दयावंता द्यावा पती।
आरती वडराजा ।।
पतिव्रते तुझी कीर्ती। ऐकुनि ज्या नारी।।
तुझे व्रत आचरती। तुझी भुवने पावती।।
पतिव्रते तुझी स्तुती। त्रिभुवनी ज्या करिती।।
स्वर्गी पुष्पवृष्टी करूनिया। आणिलासी आपुला पती।।
अभय देऊनिया। पतिव्रते तारी त्यासी।।
आरती वडराजा ।।