Skanda Sashti: स्कन्द षष्ठी एक महत्वपूर्ण व्रत एवं पर्व है, जो भगवान मुरुगन को समर्पित है। यह व्रत प्रत्येक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाता है। दक्षिण भारत विशेषकर तमिलनाडु और केरल में इसे अत्यधिक श्रद्धा से मनाया जाता है। स्कन्द षष्ठी को भगवान कार्तिकेय का दिन माना जाता है और इसे बल, साहस, संतति सुख और विजय के लिए उत्तम व्रत कहा गया है।
स्कन्द षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर राक्षस का वध किया था और दुष्ट शक्तियों पर विजय प्राप्त की थी। स्कन्द षष्ठी व्रत करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साहस, बल और सफलता मिलती है। जिन दंपत्तियों को संतान सुख नहीं मिल पाता, वे श्रद्धा से स्कन्द षष्ठी व्रत करने पर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कुंडली दोष शांति विशेषकर मंगल दोष और कर्ज संबंधी परेशानियों को दूर करने में स्कन्द षष्ठी व्रत फलदायी माना जाता है। भगवान मुरुगन की भक्ति से साधक को आध्यात्मिक उन्नति, आत्मबल और भक्ति की गहराई मिलती है।
स्कन्द षष्ठी के दिन क्या करना चाहिए:
प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
भगवान स्कन्द/कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र पर जल, पुष्प, दीपक और नैवेद्य अर्पित करें।
ॐ सरवनभवाय नमः या ॐ स्कन्दाय नमः मंत्र का जप करें।
व्रत करने वाले दिन भर फलाहार करें और संध्या समय पूजा के बाद व्रत पूर्ण करें।
स्कन्द षष्ठी कथा सुनें या पढ़ें।
स्कन्द षष्ठी के उपाय:
मंगल दोष निवारण – भगवान कार्तिकेय को लाल फूल अर्पित करें, मंगल दोष से राहत मिलेगी।
कर्ज मुक्ति – गुड़ और लाल वस्त्र का दान करें।
दुश्मनों पर विजय – स्कन्द षष्ठी पर कंद षष्ठी कवचम् का पाठ करने से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं।
संतान प्राप्ति – विवाहित स्त्रियां इस दिन भगवान कार्तिकेय को दूध और फल अर्पित कर संतान सुख की प्रार्थना करें।
रोग निवारण – नारियल और शहद का भोग लगाने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।
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