Shaniwar Daan: साल के पहले शनिवार को अवश्य करें इन चीजों का दान, मिलेगी शनिदेव की विशेष कृपा
Shaniwar Daan: सभी दिनों मे शनिवार की पूजा का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिवार के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा-पाठ करने के साथ कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। इसके प्रभाव से कर्मफलदाता शनि महाराज अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं और जातकों को साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य दोषों से राहत मिलने लगती हैं। वहीं साल के पहले शनिवार पर किए गए दान-पुण्य का फल साधक को अवश्य मिलता है। ऐसे में साल 2026 के पहले शनिवार को कुछ चीजों का दान करना और भी कल्याणकारी हो सकता है। इससे कर्ज से छुटकारा मिलने की संभावनाएं बनती हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी सुधार देखने को मिलता है।
शनिवार को काली उड़द का दान करें। यह अत्यंत शुभ होता है। इसके प्रभाव से शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या का प्रभाव कम होता है और शनि महाराज प्रसन्न होते हैं।
शनिवार की सुबह आप काले तिल दान करें। इससे सभी तरह के दोषों से राहत मिलती हैं और आपके व्यापार लाभ में आ रही बाधाएं दूर होने लगती हैं।
शनिवार के दिन आप लोहे के बर्तन का दान करें। इससे शनि दोष से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि वास करती हैं। हालांकि, प्रत्येक शनिवार को यह दान करना आपकी तरक्की में आ रही बाधाओं को दूर करता है।
आप सरसों का तेल दान करें। यह विशेष रूप से एक सरल उपाय भी है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है। इससे आपको स्वास्थ्य लाभ और कर्ज से राहत मिलती हैं।
आप इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार धन, अन्न, काले वस्त्र आदि का दान भी कर सकते हैं। यह कल्याणकारी होता है। इससे जीवन में कई तरह के परिवर्तन आते हैं। यही नहीं व्यक्ति को तनाव, रोग, अधिक परिश्रम और बाधाओं से राहत भी मिलती हैं।
शनिदेव के प्रमुख मंत्र:
जानिए शनिदेव की पूजा करते वक्त किन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है.
शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।
शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।
शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।
शनि पीड़ाहर स्तोत्र
सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: ।
दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ।।