Sankashti Chaturthi 2026: आज, 5 फरवरी 2026 को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है. यह दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करता है और व्रत रखता है, उस पर भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है. इससे साधक की बुद्धि का विकास होता है और ज्ञान में वृद्धि होती है.भगवान गणेश की पूजा का समापन हमेशा आरती के साथ करना चाहिए, क्योंकि बिना आरती के पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती|
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी.
माथे सिंदूर सोहे, मूषक की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े, फल चढ़े और चढ़े मेवा.
लड्डुओं का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया.
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी.
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
आरती के समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
एकाग्रता:
आरती के समय बातचीत करना या मोबाइल देखना वर्जित माना जाता है. अपना पूरा ध्यान भगवान की छवि और आरती के शब्दों पर रखें|
आरती की थाली घुमाने का तरीका:
आरती की थाली हमेशा घड़ी की दिशा में घुमानी चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, इसे भगवान के चरणों से शुरू करके ऊपर मुख की ओर ले जाना चाहिए|
दीपक या कपूर:
ध्यान रखें कि आरती के दौरान दीपक या कपूर बुझना नहीं चाहिए. दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल रखें. यदि गलती से बुझ जाए, तो क्षमा मांगकर दोबारा दीपक जला लें|
आरती हमेशा स्वच्छ अवस्था में करें. सीधे जमीन पर खड़े होने के बजाय किसी आसन, कपड़े या चटाई का उपयोग करें, ताकि शरीर की ऊर्जा सीधे जमीन में न जाए|
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