Sabarimala Temple: फिर चर्चा में सबरीमाला, कौन हैं भगवान अयप्पा के द्वारपालक और कितना है मंदिर के पास सोना
Sabarimala Temple: केरल के घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा सबरीमाला मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है. वजह है मंदिर से जुड़े उस रहस्य और आस्था का, जिसमें सोना, सुरक्षा और परंपराएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं. भगवान अयप्पा को समर्पित यह मंदिर सिर्फ श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक और आध्यात्मिक तथ्यों का संगम भी है. आइए जानते हैं सबरीमाला मंदिर के बारे में जो इस वक्त सोने की चोरी के मामले को लेकर चर्चा में बना हुआ है|
सबरीमाला मंदिर और सोने का रहस्य:
सबरीमाला मंदिर की संपत्ति और वहां मौजूद सोने की मात्रा हमेशा से ही कौतूहल का विषय रही है. त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB), जो इस मंदिर का प्रबंधन देखता है, की रिपोर्टों के अनुसार,सबरीमाला में श्रद्धालुओं द्वारा सदियों से चढ़ाया गया भारी मात्रा में सोना सुरक्षित रखा गया है. इसमें सोने के आभूषण, सिक्के और स्वर्ण आभूषणों के रूप में भेंट की गई वस्तुएं शामिल हैं|
नवंबर 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के पास 227 किलोग्राम सोना और 2,994 किलोग्राम चांदी बताई जाती है. हालांकि सबरीमाला मंदिर प्रशासन ने इसकी कोई आधिकारिक सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन माना जाता है कि मंदिर से जुड़ा सोना करोड़ों रुपये की कीमत का है|
कौन हैं वो द्वारपालक जिन पर चढ़ा था सोना?
सबरीमाला मंदिर में प्रवेश मार्ग पर दो प्रमुख मूर्तियां स्थापित हैं, जिन्हें स्थानीय परंपरा में द्वारपालक कहा जाता है. ये द्वारपालक मंदिर की रक्षा करने वाले प्रतीक माने जाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि जब तक इन द्वारपालकों की कृपा रहती है, तब तक मंदिर और उसकी संपत्ति सुरक्षित रहती है. कुछ समय पहले मंदिर के गर्भगृह के इन द्वारपालों पर चढ़ी सोने की परतों के गायब होने या चोरी होने की खबरें सामने आई थीं. यह परत न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद कीमती थी. इस घटना के बाद, भक्तों की आस्था को देखते हुए और मंदिर की सुरक्षा ऑडिट के बाद, इन द्वारपालों पर फिर से शुद्ध सोने की परतें चढ़ाई गईं हैं|
सबरीमाला मंदिर में किस भगवान की होती है पूजा?
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा की पूजा की जाती है. इन्हें अयप्पन, शास्ता या मणिकंदन के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान अयप्पा भगवान शिव और भगवान विष्णु के स्त्री रूप मोहिनी के पुत्र हैं. इसी कारण उन्हें हरिहरपुत्र भी कहा जाता है. मंदिर के दर्शन के लिए भक्तों को 41 दिनों का कठिन व्रत रखना पड़ता है, जिसे मण्डलम व्रत कहा जाता है. इस मंदिर में मकर संक्रांति के दिन होने वाली मकरविलक्कु पूजा का विशेष महत्व है, जिसमें मकर ज्योति के दर्शन करने लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं|