गौरी पूजा 2026 की पूरी जानकारी आवाहन से विसर्जन तक जानें परंपरा
पूजा विधि और रीति रिवाज की पूरी जानकारी
गौरी पूजा हिंदू धर्म में माता गौरी यानी मां पार्वती की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। यह पूजा खासतौर पर महाराष्ट्र, कर्नाटक और कई अन्य राज्यों में श्रद्धा और उत्साह के साथ की जाती है। वर्ष 2026 में गौरी पूजा के दौरान महिलाएं सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और सौभाग्य की कामना से माता गौरी की पूजा करती हैं। माता गौरी को भगवान शिव की अर्धांगिनी और शक्ति स्वरूपा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गौरी पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली आती है।
गौरी पूजा का महत्व
गौरी पूजा को महिलाओं के लिए विशेष महत्व वाला पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं माता गौरी का श्रृंगार करती हैं और उन्हें नए वस्त्र, आभूषण, फूल, फल और भोग अर्पित करती हैं। मान्यता है कि माता गौरी की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और परिवार में समृद्धि बनी रहती है।
गौरी आवाहन की परंपरा
गौरी पूजा की शुरुआत माता गौरी के आवाहन से होती है। पूजा स्थल को साफ कर माता गौरी की प्रतिमा या कलश स्थापित किया जाता है। इसके बाद मंत्रों के साथ माता का स्वागत किया जाता है। कई स्थानों पर गौरी प्रतिमा को घर में लाकर विशेष सजावट की जाती है।
गौरी पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
पूजा स्थल को साफ कर माता गौरी की स्थापना करें।
माता को फूल, अक्षत, कुमकुम, हल्दी और वस्त्र अर्पित करें।
माता गौरी का श्रृंगार करें।
फल, मिठाई और विशेष पकवानों का भोग लगाएं।
आरती और पूजा के बाद परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
गौरी पूजा में विशेष श्रृंगार
महाराष्ट्र और कर्नाटक में गौरी पूजा के दौरान माता की प्रतिमा को दुल्हन की तरह सजाने की परंपरा है। महिलाएं घरों में सुंदर सजावट करती हैं और पारंपरिक तरीके से पूजा करती हैं।
कई जगहों पर महिलाएं एक-दूसरे को हल्दी-कुमकुम लगाकर शुभकामनाएं भी देती हैं।
गौरी विसर्जन की परंपरा
गौरी पूजा के बाद तय समय पर माता गौरी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। विसर्जन के दौरान भक्त भजन-कीर्तन करते हुए माता को विदाई देते हैं।
कुछ स्थानों पर गौरी प्रतिमा को एक दिन रखा जाता है, जबकि कई जगह तीन दिनों तक पूजा के बाद विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है।
परंपरा और आस्था का पर्व
गौरी पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने वाला पर्व भी है। इस अवसर पर महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा करती हैं और खुशहाली की कामना करती हैं।