ज्योतिष न्यूज़ : महाराष्ट्र की भूमि संत एवं महात्माओं की रही है। यह भूमि संत एकनाथ, संत नामदेव, संत जनाबाई, संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, मुक्ताबाई, सोपानदेव आदि कई आध्यात्मिक संतों का जन्म स्थान एवं कर्म स्थान रही है। इसी श्रेणी के एक संत समर्थ रामदास स्वामी भी थे, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु और हनुमान भक्त थे। जनश्रुतियों के अनुसार, स्वामी समर्थ रामदास जी ने अपनी भक्ति और तपोबल के माध्यम से एक मृत व्यक्ति को पुनः जीवित कर दिया था। चलिए जानते हैं इस घटना को विस्तार से।
मुख्य घटना और प्रसंग
एक नवविवाहिता स्त्री मार्ग से गुजरते समय समर्थ रामदास जी को देखकर उनके चरण स्पर्श करती है। समर्थ रामदास जी उसे "अखंड सौभाग्यवती भव" (सदा सुहागिन रहो) का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। आशीर्वाद प्राप्त होते ही वह स्त्री रोने लगती है और बताती है कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है तथा वह अपने पति के शव के साथ सती होने जा रही है।
समर्थ रामदास जी विचार करते हैं कि उनके मुख से निकला राम नाम का आशीर्वाद कभी व्यर्थ नहीं हो सकता। वे तत्काल चिता के समीप पहुँचते हैं, भगवान श्री राम का ध्यान करते हैं और मृत शरीर पर अपने कमंडल से पवित्र जल निकालकर शव पर छिड़कते हुए राम नाम का जाप करते हैं। प्रभु राम की असीम कृपा और समर्थ रामदास जी के तपोबल से वह मृत ब्राह्मण चिता पर ही पुनर्जीवित होकर उठ बैठता है।
नोट: लोककथाओं में इस व्यक्ति के किसी विशेष नाम का उल्लेख नहीं मिलता, उन्हें केवल एक 'ब्राह्मण' अथवा 'स्त्री के पति' के रूप में ही दर्शाया गया है।
संदर्भ एवं उल्लेख
इस प्रसंग का वर्णन समर्थ रामदास स्वामी के जीवन और चरित्र पर आधारित कई प्रमुख साहित्य व आधुनिक ग्रंथों में प्राप्त होता है:-
श्री समर्थ चरित्र (पारंपरिक जीवनी साहित्य): समर्थ रामदास जी के जीवन पर आधारित प्राचीन व प्रामाणिक मराठी ग्रंथों (जैसे हनुमान स्वामी द्वारा रचित चरित्र व अन्य बखर साहित्य) में इस चमत्कार का स्पष्ट उल्लेख है।
अमर चित्र कथा: जन-सामान्य और बच्चों के लिए प्रकाशित 'समर्थ रामदास' नामक कॉमिक बुक में इस घटना को सचित्र प्रस्तुत किया गया है।
द डिवाइन लाइफ सोसाइटी: स्वामी शिवानंद द्वारा स्थापित संस्था के आधिकारिक प्रकाशनों (जैसे Saints of India) में इस प्रसंग का वर्णन मिलता है कि किस प्रकार आशीर्वाद देने के पश्चात उन्होंने जल छिड़ककर मृत व्यक्ति को जीवित किया।
जीवनी संबंधी साहित्य: समर्थ रामदास जी पर आधारित विभिन्न जीवनी पुस्तकों में भी इस घटना का उल्लेख मिलता है।
उल्लेखनीय है कि समर्थ रामदास स्वामी द्वारा स्वयं रचित प्रसिद्ध ग्रंथों, जैसे 'दासबोध' या 'मनाचे श्लोक' में उनके अपने चमत्कारों का कोई जिक्र नहीं है, क्योंकि इनमें केवल भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और समाज-सुधार का उपदेश दिया गया है। इस घटना का विवरण उनके शिष्यों, अनुयायियों और इतिहासकारों द्वारा रचित जीवनियों (चरित्र-ग्रंथों) के माध्यम से ही प्राप्त होता है।