Religion: बुधवार को करें ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ, सुधरने लगेगी आर्थिक स्थिति

Update: 2026-02-11 01:02 GMT
Religion: सनातन धर्म में गणेश जी प्रथम पूज्य हैं जो भक्त को व्यापार में वृद्धि, बुद्धि, मधुर वाणी का आशीर्वाद देते हैं. गणेश जी अपने सभी भक्त के जीवन की बाधाओं को दूर करते हैं और सभी संकट दूर करते हैं. बुधवार का दिन गणेश जी को समर्पित है. इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से अगर गणेश जी की पूजा करें तो उनकी कृपा पा सकते हैं. बुधवार के दिन गणेश जी की विधि अनुसार पूजा करें और व्रत का संकल्प करें और ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करें. इससे आप पर अगर भारी से भारी कर्ज है तो उससे मुक्ति मिल सकती है. आर्थिक लाभ के ऐसे रास्ते खुल सकते हैं कि आप अपने कर्ज जल्द से जल्द चुका देंगे. घर में धन समृद्धि बढ़ने लगेगी है. आइए यहां देखें ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पूरा लिरिक्स|
ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र के लाभ:
ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करने से कर्ज से शीघ्र मुक्ति मिलती है. पुराना और भारी कर्ज उतारने का रास्ता निकल जाता है|
ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और दरिद्रता का नाश होता है. घर में तेजी से धन-समृद्धि व सुख आता है|
ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करने से आय के नए स्रोत खुलते हैं. धन अर्जित कर आर्थिक संकट दूर करने का भक्त को मौका मिलता है|
ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करने से सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है. किसी भी काम में कोई भी विघ्न या बाधा नहीं आती है|
ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करने से से धन की दिक्कत तो दूर होती ही है इसके साथ ही मानसिक रूप से भी भक्त शांत होता है|
॥ ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् ॥
॥ विनियोग ॥
ॐ अस्य श्रीऋणविमोचनमहागणपति-स्तोत्रमन्त्रस्य
शुक्राचार्य ऋषिः ऋणविमोचनमहागणपतिर्देवता
अनुष्टुप् छन्दः ऋणविमोचनमहागणपतिप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।
॥ स्तोत्र पाठ ॥
ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥1॥
महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्।
एकमेवाद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥2॥
एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्।
महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥3॥
शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्।
सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥4॥
रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्।
रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥5॥
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्।
कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥6॥
पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्।
पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥7॥
सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्।
सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥8॥
एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥
॥ इति रुद्रयामले ऋणमुक्ति श्री गणेशस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
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