Pradosh Vrat: अक्तूबर में किस दिन रखा जाएगा पहला प्रदोष व्रत

Update: 2025-10-02 05:25 GMT
Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का अत्यधिक महत्व है। यह व्रत हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों पर उनकी अनुकंपा बनी रहती है। शास्त्रों में वर्णन है कि जो भी व्यक्ति श्रद्धापूर्वक प्रदोष व्रत करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। साथ ही, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी प्रदोष व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह व्रत चंद्रमा की स्थिति को मजबूत करता है, जिससे मन को स्थिरता और शांति प्राप्त होती है। मानसिक संतुलन के लिए यह व्रत बहुत प्रभावी माना जाता है। अविवाहित कन्याओं के लिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसके प्रभाव से योग्य जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि अक्तूबर में पहला प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा।
अक्तूबर में प्रदोष व्रत कब है?
आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 4 अक्तूबर 2025 को शाम 5:08 बजे आरंभ होकर 4 अक्टूबर दोपहर 3:04 बजे समाप्त होगी। ऐसे में अक्तूबर माह का पहला प्रदोष व्रत 5 अक्तूबर, रविवार को रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि:
सबसे पहले पूजा स्थान को स्वच्छ करके एक चौकी पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
शिवलिंग पर जल, दूध, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें।
इसके बाद प्रभु को बेलपत्र, शमी के फूल और पुष्पमाला अर्पित करें।
शिव मंत्रों का उच्चारण करते हुए आराधना करें।
घी का दीपक प्रज्वलित कर पूजा संपन्न करें।
माता पार्वती को श्रृंगार का सामान चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।
अंत में प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें और शिव आरती करें।
ॐ हौं जूं सः ॐ भुर्भुवः स्वः
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।
ॐ स्वः भुः भुवः ॐ सः जूं हौं ॐ।।
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