Narak Chaturdashi 2025: नरक चतुर्दशी पर पढ़ें भगवान कृष्ण और नरकासुर की पौराणिक कथा

Update: 2025-10-16 00:58 GMT
Narak Chaturdashi 2025:हर साल कार्तिक मास की चुतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है. इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा विशेष रूप से की जाती है. नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन ही भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है.इस दिन भगवान कृष्ण की जीत के उत्सव में दीप जलाए जाते हैं. इस वजह से इसे छोटी दिवाली के रूप में भी जाना जाता है. नरक चतुर्दशी की कथा पुराणों में वर्णित है. आइए वो कथा जानते हैं कि कैसे भगवान श्रीकृण ने नरकासुर का वध किया?
नरक चतुर्दशी कब है:
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 19 अक्टूबर दोपहर 01:51 पर हो रही है और इसका समापन 20 अक्टूबर दोपहर 03:44 बजे होगा. नरक चतुर्दशी का स्नान सूर्योदय से पहले होता है. ऐसे उदयातिथि के मुताबिक 20 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी होगी|
नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा:
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में नरकासुर नाम का एक अत्याचारी राक्षस था. उसके अत्याचार से देवताओं में त्राहि-त्राहि मची हुई थी. उसने वरुण का छत्र, अदिती के कुंडल और देवताओं से मणि छीन ली थी और तीन लोकों पर अधिकार स्थापित कर लिया था. एक दिन देवराज इंद्र भगवान कृष्ण के पास नरकासुर से बचाने की विनती लिए पहुंचे|
देवराज ने भगवान को बताया कि नरकासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं और आमजन की कन्याओं का भी हरण कर लिया है और उनको बंदीगृह में डाल दिया है. उन्होंने कहा कि भगवान आप तीनों लोकों की उस राक्षस से रक्षा कीजिए. देवराज इंद्र की बात सुनकर भगवान कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ गरूड़ पर सवार हुए और प्रागज्योतषपुर पहुंचे. नकरासुर यहीं रहता था|
भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी की सहायता से पहले मुर नामक राक्षस के साथ उसके 6 पुत्रों का वध किया. इस बात की खबर जब नरकासुर को लगी तो वो सेना लेकर भगवान से युद्ध के लिए निकल पड़ा. नरकासुर को ये श्राप था कि उसकी मृत्यु एक स्त्री के हाथों से होगी और इसलिए श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा उनकी सारथी बनीं. सत्यभामा की मदद से भगवान ने नरकासुर का अंत किया|
भगवान कृष्ण ने ना सिर्फ नरकासुर का वध किया, बल्कि उसकी कैद से लगभग 16 हजार महिलाओं को छुड़ाया. जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत किया, उस दिस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी, इसलिए इस तिथि को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है. लोग इस दिन भगवान की जीत की खुशी दीप जालकर मनाते हैं|
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