Matsya Dwadashi 2025: आज मनाई जाएगी मत्स्य द्वादशी, इस विधि से करें पूजा

Update: 2025-12-02 02:47 GMT
Matsya Dwadashi 2025: मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मत्स्य द्वादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की पूजा की जाती है, इसलिए इसे मत्स्य द्वादशी के नाम से जाना जाता है। बता दें कि श्री हरि विष्णु के दस अवतारों में से भगवान मत्स्य को प्रथम अवतार माना जाता है। मत्स्य द्वादशी के दिन विष्णु जी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से जातक को कई गुना अधिक शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस साल मत्स्य द्वादशी 2 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी। तो आइए अब जानते हैं मत्स्य द्वादशी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में।
मत्स्य द्वादशी 2025 शुभ मुहूर्त
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि आरंभ- 1 दिसंबर 2025 को शाम 7 बजकर 1 मिनट से
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि समाप्त- 2 दिसंबर 2025 को दोपहर 3 बजकर 57 मिनट पर
मत्स्य द्वादशी पारण का समय- 3 दिसंबर को सुबह 6 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक
मत्स्य द्वादशी व्रत पूजा विधि
द्वादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि कर साफ वस्त्र पहल लें।
इसके बाद पूजा मंदिर या पूजा स्थल को साफ-सुथरा कर गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें।
अब एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
इसके बाद फूल, अक्षत्, धूप, दीप और नैवेद्य आदि पूजा सामग्री को श्री हरि के चरणों में अर्पित करें।
केशवाय नमस्तुभ्यम्। मंत्र से भगवान विष्णु का पूजन करें।
इसी मंत्र का उच्चारण करते हुये घृत मिश्रित तिल की एक सौ आठ आहुतियां प्रज्वलित अग्नि में अर्पित करें।
रात्रिकाल में भगवान विष्णु के समीप जागरण करें।
जागरण की रात्रि में एक सेर दुग्ध से भगवान श्रीनारायण का अभिषेक करें।
गायन, वादन, नैवेद्य, भोजन आदि सहित नाना प्रकार के भोज्य पदार्थों से देवी मां लक्ष्मी सहित भगवान नारायण का भक्तिपूर्वक तीन समय पूजन करें।
पूजा के बाद दक्षिणा, खीर एवं नारियल का फल ब्राह्मण को दान करें।
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