Nag Panchami Upay ज्योतिष न्यूज़ : नाग पंचमी के दिन नाग देवता और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से कुंडली में बताए जाने वाले कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की भी मान्यता है। आइए जानते हैं नाग पंचमी पर किए जाने वाले 5 आसान उपाय।
शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें
नागराज वासुकी का संबंध भगवान शिव से माना जाता है। इसलिए नाग पंचमी पर शिव पूजा के साथ नाग देवता की आराधना करना शुभ माना जाता है। इस दिन सबसे पहले भगवान शिव की विधिवत पूजा करें और फिर शिवलिंग पर दूध अर्पित करें। इसके बाद महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे नकारात्मक प्रभावों को कम करने और मानसिक शांति पाने में मदद मिलती है।
पीपल के पेड़ से जुड़ा उपाय करें
नाग पंचमी पर पीपल के पेड़ की पूजा से जुड़ा उपाय भी किया जाता है। इसके लिए पेड़ के नीचे साफ स्थान पर कच्चा दूध अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। इसके बाद आटा, घी और गुड़ से तैयार छोटे लड्डू अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, यह उपाय कालसर्प दोष से जुड़ी परेशानियों को कम करने में सहायक हो सकता है।
41 दिनों तक चंदन का तिलक लगाएं
नाग पंचमी के दिन माथे पर चंदन का तिलक लगाना भी शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, यदि नाग पंचमी से लगातार 41 दिनों तक चंदन का तिलक लगाया जाए तो इससे नकारात्मकता कम करने और मन को शांत रखने में मदद मिल सकती है। यह एक सरल उपाय है, जिसे आसानी से किया जा सकता है।
काले तिल मिले जल से शिवलिंग का अभिषेक
नाग पंचमी पर एक लोटे में साफ जल लेकर उसमें थोड़े काले तिल मिला लें। इसके बाद इस जल को शिवलिंग पर अर्पित करें और भगवान शिव का स्मरण करें। मान्यता है कि काले तिल से जुड़ा यह उपाय ग्रह संबंधी नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और कालसर्प दोष से जुड़ी परेशानियों को कम करने के लिए किया जाता है।
चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करें
कालसर्प दोष से राहत के लिए नाग पंचमी पर चांदी के नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करने की भी मान्यता है। इसके लिए चांदी के नाग-नागिन के जोड़े को शिव मंदिर में ले जाकर भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। कुछ परंपराओं में दूसरे जोड़े को पवित्र नदी में प्रवाहित करने की बात कही जाती है। हालांकि, नदी में कोई वस्तु प्रवाहित करने के बजाय स्थानीय धार्मिक परंपरा और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करना बेहतर है।