हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। इस बार परिवर्तिनी एकादशी की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है कि व्रत आज रखा जाए या कल। पंचांग के अनुसार, उदयातिथि के आधार पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखना उत्तम माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा के दौरान करवट बदलते हैं। इसी कारण इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पद्मा एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी की सही तिथि
पंचांग गणना के अनुसार, एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात से शुरू होकर 22 सितंबर तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 22 सितंबर को व्रत रखना शुभ माना जा रहा है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत का संकल्प ले सकते हैं। एकादशी व्रत में तिथि और पारण का विशेष महत्व होता है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजा और पारण का समय भी देख लेना चाहिए।
भगवान विष्णु की पूजा का विधान
परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। भक्त भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, तुलसी दल, चंदन और फल अर्पित करते हैं।
इस दिन विष्णु मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है। शाम के समय भगवान विष्णु की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। भक्त इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से मन की शुद्धि होती है और व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है। हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं।
व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
एकादशी के दिन सात्विक भोजन करें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का प्रयोग करें
क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें
जरूरतमंदों को दान करें
द्वादशी तिथि में नियम के अनुसार पारण करें
व्रत का फल
धार्मिक मान्यता के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों को पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।
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