Maha Shivratri 2026 Vrat Katha: धर्मग्रंथों में महाशिवरात्रि व्रत की बड़ी महिमा बताई जाती है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ रखता है उसके जीवन की तमाम बाधाएं दूर हो जाती हैं। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस बार ये व्रत 15 फरवरी 2026 को रखा जा रहा है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 11 मिनट से लेकर देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में महाशिवरात्रि की पावन कथा पढ़ना बिल्कुल भी न भूलें।
महाशिवरात्रि व्रत कथा:
प्राचीन समय में चित्रभानु नाम का एक शिकारी रहता था। वह जंगल में शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। कर्ज न चुका पाने के कारण एक साहूकार ने उसे शिव-मठ में बंदी बना लिया। संयोग से उसी दिन शिवरात्रि थी। मठ में बंद रहते हुए उसने शिव भक्ति से जुड़ी बातें सुनीं और व्रत कथा भी उसके कानों में पड़ी। संध्या के समय में साहूकार ने उसे बुलाकर कर्ज चुकाने को कहा। शिकारी ने अगले दिन पूरा ऋण लौटाने का वचन दिया। साहूकार ने उसे छोड़ दिया। भूख और प्यास से व्याकुल शिकारी शिकार की तलाश में जंगल की ओर निकल पड़ा।
सूर्यास्त के समय वह एक जलाशय के पास पहुंचा। वहीं बेल के पेड़ पर चढ़कर उसने मचान बना ली। उसे नहीं पता था कि उसी पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थित है, जो सूखे बेलपत्रों से ढका हुआ था। मचान बनाते समय उससे जो टहनियां टूटीं, वे नीचे शिवलिंग पर गिर पड़ीं। अनजाने में ही सही उसका शिवरात्रि का व्रत और उसकी पहले प्रहर की पूजा संपन्न हो गई।
रात्रि का पहला पहर बीतने पर एक गर्भिणी हिरणी वहां पानी पीने आई। शिकारी ने धनुष उठाया, लेकिन तभी उसके हाथ से कुछ पत्ते और जल की बूंदें फिर से नीचे शिवलिंग पर गिर पड़ीं। हिरणी ने दया की याचना करते हुए कहा कि वह प्रसव के बाद लौट आएगी। शिकारी का मन पिघल गया और उसने उसे जाने दिया। कुछ समय बाद दूसरी हिरणी आई। शिकारी ने फिर तीर साधा। इस बार भी बेलपत्र शिवलिंग पर गिर पड़े और दूसरे पहर की पूजा भी अनजाने में पूरी हो गई। हिरणी ने अपने प्रिय से मिलकर लौटने का वचन दिया। शिकारी ने उसे भी जीवनदान दे दिया।
रात्रि के अंतिम भाग में तीसरी हिरणी अपने बच्चों के साथ आई। शिकारी ने उसे भी मारने का विचार किया, लेकिन मृगी बोली मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मारो। मां की ममता देखकर उसका हृदय द्रवित हो उठा। उसने तीसरी हिरणी को भी जाने दिया। इस दौरान बेलपत्र गिरते रहे और तीसरे पहर की पूजा भी अपने आप संपन्न हो गई।
भोर होने को थी कि एक हृष्ट-पुष्ट हिरण वहां आया। उसने विनम्र स्वर में कहा कि यदि शिकारी ने उसकी पत्नी और बच्चों को जीवित छोड़ा है, तो वह उसे भी कुछ समय के लिए जीवनदान दे दे। हिरण की सच्चाई और वचनबद्धता देखकर शिकारी का हृदय पूरी तरह बदल गया। उसने धनुष-बाण त्याग दिए। कुछ ही देर बाद वह हिरण वादे के अनुसार अपने पूरे परिवार के साथ लौट आया। उनकी सत्यनिष्ठा और आपसी प्रेम देखकर शिकारी की आंखों से आंसू बह निकले। उसने प्रण लिया कि वह जीवन में अब कभी हिंसा नहीं करेगा। उसी क्षण देवताओं ने उसकी परीक्षा को सफल माना।
तभी भगवान शिव प्रकट हुए और शिकारी को आशीर्वाद दिया। उसकी करुणा से प्रसन्न होकर उसे नया जीवन पथ अपनाने का वरदान मिला और उसे 'गुह' नाम प्रदान हुआ। यही गुह आगे चलकर भगवान श्रीराम का सखा बना। इस प्रकार महाशिवरात्रि के व्रत, रात्रि जागरण और अनजाने में हुई पूजा ने एक कठोर हृदय वाले शिकारी को दयालु और धर्मपरायण बना दिया। ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव!
महाशिवरात्रि के भजन:
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम
खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम
देवो के हित विष पी डाला, नील कंठ को कोटि प्रणाम, नील कंठ को कोटि प्रणाम
सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
शिव के चरणों में मिलते हैं सारी तीरथ चारो धाम
शिव के चरणों में मिलते हैं सारी तीरथ चारो धाम
करनी का सुख तेरे हाथों, शिव के हाथों में परिणाम, शिव के हाथों में परिणाम
सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम ॥
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
शिव के रहते कैसी चिंता, साथ रहे प्रभु आठों याम
शिव के रहते कैसी चिंता, साथ रहे प्रभु आठों याम
शिव को भजले सुख पायेगा, मन को आएगा आराम, मन को आएगा आराम
सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम ॥
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
Tags: