भगवान विष्णु इस दिन से योग निद्रा में चले जाएंगे, नही होंगे कोई चार महीनों तक शुभ कार्य

आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी होती है. सभी एकादशियों की तरह ये एकादशी भी भगवान नारायण को समर्पित है.

Update: 2021-07-06 05:53 GMT

आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी होती है. सभी एकादशियों की तरह ये एकादशी भी भगवान नारायण को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा के लिए क्षीर सागर में चले जाते हैं. आम बोलचाल में इसे ही देव का शयन कहा जाता है, इसीलिए एकादशी देवशयनी एकादशी के नाम से जानी जाती है.

इस बार देवशयनी एकादशी 20 जुलाई को है. इस दिन से श्री हरि चार माह के लिए शयन के लिए चले जाएंगे. इस दौरान संसार के पालनहार का जिम्मा महादेव पर होगा. देवशयनी एकादशी के साथ ही चतुर्मास की शुरुआत हो जाएगी. चतुर्मास के दौरान किसी भी तरह के शुभ काम नहीं होंगे. 15 नवंबर को कार्तिक महीने की देवोत्थान एकादशी पर भगवान नारायण अपनी निद्रा से जागेंगे और तभी से मांगलिक कार्य फिर से शुरू होंगे.

शुभ मुहूर्त
देवशयनी एकादशी तिथि : दिन मंगलवार, 20 जुलाई 2021 को
एकादशी तिथि प्रारम्भ –19 जुलाई, 2021 को रात 09:59 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त – 20 जुलाई, 2021 को शाम 07:17 बजे तक
पारण तिथि : 21, जुलाई को सुबह 05:36 से सुबह 08:21 तक
ऐसे करें पूजन
दशमी तिथि को शाम का भोजन सूर्यास्त से पहले खाएं और इसके बाद पानी के अलावा कुछ ग्रहण न करें. एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के ​बाद भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प लें. इसके बाद मंदिर में दीप प्रज्वलित करें और नारायण का अभिषेक गंगाजल से करें. भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें. देवशयनी एकादशी की कथा पढ़ें और आरती गाएं. भगवान को भोग लगाएं और आखिर में क्षमा याचना करें. दिन भर व्रत रखें. रात में जागरण करके भगवान के भजन गाएं. यदि सोना हो तो जमीन पर सोएं. अगले दिन स्नान के बाद किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर यथा संभव दक्षिणा दें और व्रत का पारण करें. दशमी की रात से द्वादशी तिथि तक ब्रह्मचर्य का पालन करें.


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