Gupt Navratri: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में 9 रात तक करें ये गुप्त साधना, जो चाहोगे वो मिलेगा
Gupt Navratri: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का बहुत महत्व है। यह आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति, शत्रु नाश, भय और बाधा से मुक्ति, वशीकरण और आत्मबल वृद्धि के लिए उपयुक्त है। तंत्र-साधना में रुचि रखने वालों के लिए यह सिद्धि प्राप्त करने का उत्तम समय माना जाता है। व्यापार, मुकदमे, बीमारी, दुश्मन आदि से छुटकारे के लिए यह विशेष लाभकारी है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में इन देवियों की पूजा होती है
गुप्त नवरात्रि में नवदुर्गा के साथ-साथ विशेष तांत्रिक देवियों की पूजा की जाती है: काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला। इन देवीयों को दस महाविद्याओं में गिना जाता है और ये गुप्त साधनाओं की प्रमुख देवियां हैं।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की प्रतिपदा से नवमी तक 9 रातें करें इस मंत्र का जाप। साधना का समय रात्रि 12 बजे (अर्धरात्रि) से 2 बजे के बीच का रहेगा। शांत, एकांत स्थान चुनें (यदि संभव हो तो पीपल के वृक्ष के नीचे, या काले कपड़े से ढका एक साधन कक्ष)। साधना दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करें।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि मंत्र- ॐ क्रीं कालप्रिये स्वाहा॥
यदि विधिपूर्वक इस मंत्र का जाप किया जाए तो काल भय, दुर्भाग्य, कर्ज, मानसिक भ्रम और दुर्बलता से मुक्ति मिलती है। अकस्मात मृत्यु या भय से सुरक्षा प्राप्त होती है। रात्रि भय, तंत्र दोष और बुरे स्वप्नों का अंत होता है। कोर्ट-कचहरी, शत्रु या शारीरिक-मानसिक बाधा से मुक्ति मिलती है। तंत्रिक साधनाओं में प्रगति होती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पर 9 रात करें ये उपाय:
धन संबंधित किसी भी तरह की समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा चाहते हैं तो महालक्षमी के चरणों में कमल का फूल चढ़ाकर श्रीं श्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का एक माला जाप करें।
शिवशक्ति की पूजा करें ॐ वज्रैकरण शिवे रुध रुध भवे ममाई अमृत कुरु कुरु स्वाहा मंत्र का एक माला जाप करें। मैरिड लाइफ से मुंह मोड़ चुकी खुशियां लौट आएंगी।
पीले कपड़े में चने की दाल और हल्दी की गांठ बांधकर मां बगलामुखी को चढ़ाने से घर में चल रहा कलह-कलेश समाप्त होता है।
संतान सुख अथवा बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि, नंद गोप सुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः मंत्र का जाप करें।
नव ग्रहों की शुभता प्राप्त करने के लिए नौ दिनों तक गाय को हरा चारा खिलाएं। संभव हो तो इसे दैनिक कार्य का हिस्सा बना लें।