Ganpati Visarjan Shubh Muhurat and vidhi: गणेश प्रतिमा को घर में कितने दिनों तक विराजमान रखना है, इसका निर्धारण शास्त्रों में बताया गया है। आमतौर पर भक्त बप्पा को 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 11 दिन तक रखते हैं। अधिकतर लोग 11वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर ही बप्पा को विधि-विधान और भक्ति भाव के साथ विदा करते हैं। इस दिन को गणेश जन्मोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इस साल के गणेश उत्सव की शुरुआत 27 अगस्त, बुधवार से हो चुकी है, जिसका समापन भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर, शनिवार को होगा। गणेश उत्सव का समापन गणेश विसर्जन के साथ होता है।
गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त:
प्रातः मुहूर्त (शुभ) - 07:36 ए एम से 09:10 ए एम
अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - 12:19 पी एम से 05:02 पी एम
सायाह्न मुहूर्त (लाभ) - 06:37 पी एम से 08:02 पी एम
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - 09:28 पी एम से 01:45 ए एम, सितम्बर 07
उषाकाल मुहूर्त (लाभ) - 04:36 ए एम से 06:02 ए एम, सितम्बर 07
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - 06 सितम्बर 2025 को 03:12 ए एम बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त - 07 सितम्बर 2025 को 01:41 ए एम बजे
गणपति विसर्जन विधि: विसर्जन के दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाएं और आसन पर बैठ जाएं। ‘ओम् गं गणपतये नम:’ मंत्र का जप करें।
गणेश जी को अक्षत, फूल, धूप और धन अर्पित करें। गणेश जी की आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ करें। बप्पा को उनका प्रिय भोग जैसे मोदक या लड्डू अर्पित करें। पूजा में हुई किसी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
फिर गणेश जी की मूर्ति को श्रद्धा से उठाएं और विसर्जन के लिए ले जाएं। ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आना’ के जयकारों के साथ बप्पा को विदा करें। मूर्ति को पवित्र नदी, तालाब या जलस्रोत में विसर्जित करें।
यदि इको-फ्रेंडली मूर्ति है तो घर में बाल्टी या टब में विसर्जन करें और उस जल को पौधों में अर्पित करें। परंपरा के अनुसार यह विश्वास है कि गणपति बप्पा जाते समय घर की नकारात्मकता और दुख अपने साथ ले जाते हैं और पीछे सुख-समृद्धि छोड़ जाते हैं।
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