Mangla Gauri Vrat ज्योतिष न्यूज़ : हिंदू परंपरा में मंगला गौरी व्रत को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यह व्रत सावन माह के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाता है और विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए इसे करती हैं। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है, जिन्हें सौभाग्य और अखंड सुहाग की देवी माना जाता है। इस वर्ष सावन में चार मंगलवार पड़ रहे हैं, जिनमें पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धा से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता बनी रहती है।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
व्रत की शुरुआत प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र पहनने से होती है। सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ कर एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। इस पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें तथा गंगाजल से स्थान को पवित्र करें। फिर श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें।
पूजा के दौरान माता पार्वती को लाल वस्त्र अर्पित करें और आटे का दीपक बनाकर प्रज्वलित करें। इसके बाद विधिपूर्वक शिव-पार्वती की पूजा करें और मंत्रों का जाप करें। व्रत में 16 संख्या का विशेष महत्व होता है, इसलिए पान, सुपारी, इलायची, लौंग, फल, फूल, मिठाई आदि 16 प्रकार की सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही माता को सुहाग का सामान भी चढ़ाएं।
पूजन के बाद आरती करें और पांच प्रकार के मेवे तथा सात प्रकार के अन्न अर्पित करें। इसके पश्चात मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। पूजा समाप्त होने पर प्रसाद परिवारजनों में वितरित करें और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान दें।
मंगला गौरी व्रत पूजा मंत्र
'सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।'
'ॐ उमामहेश्वराय नम:' मंत्र का भी आप जप कर सकते हैं।
मंगला गौरी व्रत नियम
नियमों के अनुसार, व्रती को दिन में एक बार ही भोजन करना चाहिए। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो, तो व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। मान्यता है कि यदि यह व्रत लगातार पांच वर्षों तक किया जाए, तो पांचवें वर्ष सावन के अंतिम मंगलवार को विधिपूर्वक उद्यापन करना चाहिए। उद्यापन के बिना व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता। श्रद्धा और नियम के साथ किया गया मंगला गौरी व्रत जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य प्रदान करता है।