Dharma: कब है पूर्णिमा, गलती से बचने के लिए जान लें सही तारीख और स्नान-दान का समय
Dharma: साल में 12 पूर्णिमा तिथि आती हैं और उन सभी का अपना अलग महत्व होता है. मार्च में फाल्गुन पूर्णिमा पड़ रही है. फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन धुलैण्डी यानी कि रंगों वाली होली खेली जाती है. साथ ही फाल्गुन पूर्णिमा के दिन गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है. हिंदु धर्म का प्रमुख त्योहार होली के कारण फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष महत्व है ही लेकिन इस बार की फाल्गुन पूर्णिमा और भी खास है. वजह है इस दिन लगने जा रहा चंद्र ग्रहण|
पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण :
मार्च में फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है. वहीं पूर्णिमा तिथि 2 दिन पड़ने से फाल्गुन पूर्णिमा की सही तारीख को लेकर लोगों में कंफ्यूजन है. पंचांग के अनुसार फागुन या फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगा. वहीं फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का समापन 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर होगा. 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा मानी जा रही है. 3 मार्च को पूर्णिमा पर स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 19 मिनट से सुबह 6 बजकर 8 मिनट तक रहेगा. वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से दोपहर 1 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. साथ ही इस पूर्णिमा पर चंद्रोदय शाम 6 बजकर 44 मिनट पर होगा|
पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण, कैसे होगा होलिका दहन?
चूंकि 3 मार्च को ही चंद्र ग्रहण लग रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल है कि चंद्र ग्रहण और उसके सूतक काल के चलते इस दिन होलिका दहन कैसे होगा. तो इसे लेकर 2 विकल्प हैं. कुछ लोग 2 मार्च की रात को होलिका दहन करने और 4 मार्च को होली मनाने की योजना बना रहे हैं. वहीं जो लोग 3 मार्च को होलिका दहन करना चाहते हैं, वे शाम को 7 बजे के बाद चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद होलिका दहन करें|
हिंदू धर्म में मान्यता है कि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन समुद्र मंथन से धन की देवी लक्ष्मी प्रकट हुईं थीं. इसलिए फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी जयंती मनाई जाती है. फाल्गुन पूर्णिमा की रात को लक्ष्मी जी की विशेष पूजा-अर्चना करें, इससे धन-समृद्धि बढ़ती है. साथ ही चंद्र देव को अर्घ्य दें, इससे कुंडली का चंद्र-दोष दूर होता है|