योगिनी एकादशी की सही डेट और पूजा तरीका

यहां मिलेगी पूरी जानकारी

Update: 2026-06-23 16:12 GMT

Religion धर्म : हिंदू पंचांग के अनुसार जुलाई के महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं। इसी क्रम में आषाढ़ माह का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है, जो 30 जून से प्रारंभ होगा। इस माह में योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी जैसे महत्वपूर्ण व्रत पड़ते हैं, जिनका धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व है।

योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र व्रत माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले कई प्रकार के कष्टों का निवारण होता है और पापों से मुक्ति मिलती है।

मान्यता यह भी है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि यह एकादशी व्रत धार्मिक रूप से अत्यंत फलदायी माना जाता है।

आषाढ़ माह की योगिनी एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। पंचांग के अनुसार, यह एकादशी हर वर्ष आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते हैं।

पूजा विधि के अनुसार, श्रद्धालु भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाते हैं, तुलसी पत्र अर्पित करते हैं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। इसके साथ ही दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत का पालन किया जाता है।

व्रत के अगले दिन पारण करने से पहले ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान देना भी शुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

कुल मिलाकर, योगिनी एकादशी का व्रत धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है, जो भक्तों को जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता प्रदान करता है।

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