धर्म-अध्यात्म

7वें भाव में चंद्रमा से जीवनसाथी के गुण जानें

Ratna Netam
23 Jun 2026 8:44 PM IST
7वें भाव में चंद्रमा से जीवनसाथी के गुण जानें
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शादी और रिश्तों पर असर

Religion धर्म : कुंडली और उसके विभिन्न भावों को समझना कई लोगों के लिए जटिल लगता है, लेकिन थोड़ी सी जानकारी के साथ इसके संकेतों को आसानी से समझा जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के 12 भावों में से 7वां भाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह विवाह, जीवनसाथी, पार्टनरशिप और रिश्तों से जुड़ा होता है।

7वें भाव को दांपत्य जीवन का मुख्य आधार माना जाता है। इसी भाव से यह समझा जाता है कि व्यक्ति का वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा और उसका जीवनसाथी किस स्वभाव का हो सकता है। जब इस भाव में किसी ग्रह की स्थिति देखी जाती है, तो उसका प्रभाव सीधे रिश्तों और शादीशुदा जीवन पर पड़ता है।

ज्योतिष के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली के 7वें भाव में चंद्रमा स्थित हो, तो इसका विशेष प्रभाव देखने को मिलता है। चंद्रमा को मन, भावना, सोच और स्वभाव का प्रमुख कारक ग्रह माना जाता है। यह व्यक्ति के मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिति को दर्शाता है।

7वें भाव में चंद्रमा होने पर व्यक्ति भावनात्मक रूप से अपने जीवनसाथी से जुड़ा हुआ रहता है। ऐसे लोग रिश्तों में संवेदनशील और भावुक स्वभाव के होते हैं। वे अपने पार्टनर के प्रति गहरी भावना रखते हैं और रिश्ते को निभाने में काफी गंभीर होते हैं।

हालांकि, कई बार चंद्रमा की यह स्थिति व्यक्ति को अत्यधिक भावुक भी बना सकती है, जिससे रिश्तों में उतार-चढ़ाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। छोटी-छोटी बातों को लेकर मन में असुरक्षा या चिंता की भावना भी बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में जीवनसाथी का स्वभाव शांत और समझदार होना रिश्तों को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है। यदि दोनों पार्टनर एक-दूसरे की भावनाओं को समझें, तो यह स्थिति वैवाहिक जीवन में सकारात्मक परिणाम भी दे सकती है।

कुल मिलाकर, कुंडली के 7वें भाव में चंद्रमा का होना रिश्तों में भावनात्मक गहराई को दर्शाता है, लेकिन इसके प्रभाव व्यक्ति की पूरी कुंडली और अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करते हैं।

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