Pitru Paksha 2026: जानें इस साल कब से शुरू हो रहे हैं श्राद्ध, ये हैं मुख्य तिथियां

Update: 2026-07-13 13:30 GMT
Pitru Paksha 2026 ज्योतिष न्यूज़ : हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय सबसे खास माना जाता है, क्योंकि यह 15 दिनों की ऐसी पवित्र अवधि होती है, जब सभी अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान पितरों की आत्माएं पृथ्वी लोक पर अपने वंशजों के पास आती हैं और श्रद्धा भाव से किए गए तर्पण व दान से प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ पक्ष में विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोष शांत होता है, जीवन में आ रही अनेक बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में पितृ पक्ष कब से शुरू होगा, इसकी प्रमुख तिथियां क्या हैं।
पितृ पक्ष 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से आश्विन मास के कृष्ण पक्ष का आरंभ होता है और इसी के साथ पितृ पक्ष प्रारंभ हो जाता है। वर्ष 2026 में आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर 2026 को रात 10 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी। इसके साथ ही श्राद्ध पक्ष का शुभारंभ माना जाएगा। वहीं, पितृ पक्ष का समापन 10 अक्तूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। शास्त्रों की मानें, तो जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती है या किसी कारणवश श्राद्ध नहीं कर पाते है, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध व पिंडदान कर सकते हैं।
पितृ पक्ष 2026 श्राद्ध की प्रमुख तिथियां
26 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर - प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर - द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर - तृतीया श्राद्ध व महाभरणी
30 सितंबर - चतुर्थी व पंचमी श्राद्ध
1 अक्तूबर -षष्ठी श्राद्ध
2 अक्तूबर -सप्तमी श्राद्ध
3 अक्तूबर -अष्टमी श्राद्ध
4 अक्तूबर - नवमी श्राद्ध
5 अक्तूबर -दशमी श्राद्ध
6 अक्तूबर- एकादशी श्राद्ध
7 अक्तूबर - द्वादशी व मघा श्राद्ध
8 अक्तूबर -त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्तूबर-चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्तूबर - सर्वपितृ अमावस्या
पितृ दोष निवारण मंत्र
ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः।
गायत्री पितृ दोष निवारण मंत्र
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।
पितृ स्तोत्रं पाठ
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ॥
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ॥
मन्वादीनां मुनीन्द्राणां सूर्याचन्द्रमसोस्तथा ।
तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि ॥
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येsहं कृताञ्जलि: ॥
प्रजापते: कश्यपाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥
नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ॥
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ॥
अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्नीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ॥
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ॥
तेभ्योsखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानस:।
नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुज: ॥
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