Anasar काल के बाद नवयौवन स्वरूप में दिखेंगे जगन्नाथ, रथयात्रा की तैयारियां पूरी

Update: 2026-07-13 15:11 GMT

Puri. पुरी :  भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए जल्द ही शुभ अवसर आने वाला है। 15 दिनों तक अनासर काल (एकांतवास) में रहने और औषधीय उपचार के बाद भगवान जगन्नाथ अपने नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवयौवन दर्शन को बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इस विशेष दर्शन के लिए मंदिर परिसर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।

अनासर काल के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं। इस अवधि में भगवान का औषधीय उपचार किया जाता है और उन्हें विश्राम दिया जाता है। अब नवयौवन दर्शन के साथ ही भक्तों को भगवान के नए स्वरूप के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा।

उत्कल सेवा समिति की ओर से नवयौवन दर्शन को लेकर मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है। मंदिर में फूलों की सजावट और आकर्षक विद्युत व्यवस्था की जा रही है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को विशेष पुष्प श्रृंगार से सजाया जाएगा।

14 जुलाई को होंगे नवयौवन दर्शन

जानकारी के अनुसार, 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ भक्तों को नवयौवन स्वरूप में दर्शन देंगे। मंगलवार सुबह भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इस दौरान भगवान श्वेत वस्त्र धारण करेंगे। मंगला आरती के साथ नवयौवन दर्शन की शुरुआत होगी, जिसके बाद श्रद्धालु शयन आरती तक भगवान के दर्शन कर सकेंगे।

इस विशेष अवसर पर भगवान जगन्नाथ को विशेष भोग भी अर्पित किया जाएगा। भगवान को परवल की मिठाई, परवल का जूस सहित कई अन्य व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा।

नेत्र उत्सव और प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन

14 जुलाई को भगवान को अंतगृह से बाहर लाया जाएगा। दोपहर 12 बजे से नेत्र उत्सव का आयोजन होगा, जो दोपहर 3 बजे तक चलेगा। इसके बाद भगवान की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा। शाम को विशेष आरती के बाद रथयात्रा की तैयारियां और तेज हो जाएंगी।

16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा

आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया के अवसर पर 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और भगवान सुदर्शन अपने सिंहासन से उतरकर रथों पर विराजमान होंगे।

रथयात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर रथ की रस्सी खींचेंगे और पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। रथयात्रा के बाद भगवान नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में प्रवास करेंगे। इसके बाद घूरती रथयात्रा के दिन भगवान वापस मुख्य मंदिर लौटेंगे।

रथ को दिया जा रहा भव्य स्वरूप

रथयात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। भगवान के रथ को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। रथ को सजाने के लिए विशेष पीला कपड़ा ओडिशा से मंगाया गया है। रथ को लाल और पीले रंगों से सजाकर भव्य बनाया जा रहा है।

भगवान के वस्त्र पुरी से और रथ व मंदिर सजावट के लिए फूल कोलकाता से मंगाए गए हैं। रथ के चारों ओर भगवान विष्णु के दशावतारों का सुंदर चित्रण किया गया है, जिसमें वामन, नरसिंह सहित अन्य अवतारों को दर्शाया गया है।

समिति को उम्मीद है कि नवयौवन दर्शन और रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे और भक्त भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद का लाभ प्राप्त करेंगे।

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