Chitragupta Puja 2025: चित्रगुप्त की पूजा क्यों की जाती है, जानें महत्व
Chitragupta Puja 2025: आज भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। सनातन धर्म के शास्त्रों में भाई दूज के दिन चित्रगुप्त की पूजा का विधान है। चित्रगुप्त को मृत्यु के देवता यमराज का सहायक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि चित्रगुप्त पृथ्वी पर जन्म लेने वाले सभी प्राणियों का लेखा-जोखा रखते हैं। इस दिन कलम और दवात की भी पूजा की जाती है। इसी कारण इस दिन को मस्याधर (कलम और दवात) पूजा भी कहा जाता है।
पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इस दिन भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति के रूप में पूजा की जाती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, चित्रगुप्त का जन्म भगवान ब्रह्मा के मन से हुआ था। चित्रगुप्त को न केवल यमराज का सहायक माना जाता है, बल्कि उन्हें देवताओं का लेखाकार भी कहा जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार:
चित्रगुप्त की पूजा कई अन्य कारणों से भी की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, अपनी बहन यमुना के आतिथ्य से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया था कि जो कोई भी भाई दूज या यम द्वितीया के दिन अपनी बहन के घर जाएगा, उनसे तिलक लगाएगा और उनके हाथ का बना भोजन ग्रहण करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। चूँकि चित्रगुप्त यमराज के सहायक हैं, इसलिए भाई दूज के दिन उनकी पूजा की जाती है।
भगवान चित्रगुप्त कलम और दवात की सहायता से सभी प्राणियों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। इसलिए इस दिन कलम, दवात और बहीखाते की भी पूजा की जाती है। जो लोग इस दिन चित्रगुप्त की पूजा करते हैं उन्हें ज्ञान, बुद्धि, साहस और लेखन कौशल की प्राप्ति होती है। साथ ही, उनके व्यवसाय में उन्नति की भी संभावना होती है।