Bhai Dooj 2025: सिर्फ 2 घंटे 15 मिनट का शुभ मुहूर्त, शिववास योग में तिलक से मिलेगा दोगुना फल
Religion Spirituality ,धर्म अध्यात्म : कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला भाई दूज (या भाई बीज) इस वर्ष विशेष संयोग के साथ आ रहा है। भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प का यह पर्व 24 अक्टूबर 2025, बुधवार को मनाया जाएगा। इस बार भाई दूज पर शिववास योग बन रहा है, जो इसे और अधिक शुभ और फलदायक बना रहा है।
हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बार तिलक और पूजन के लिए शुभ मुहूर्त केवल 2 घंटे 15 मिनट का ही है। ऐसे में जो भी बहनें अपने भाइयों को तिलक करना चाहती हैं, उन्हें निश्चित समय के भीतर यह परंपरा पूरी करनी होगी, ताकि पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
भाई दूज का शुभ मुहूर्त 2025:
भाई दूज तिथि आरंभ: 24 अक्टूबर 2025, सुबह 06:35 बजे
भाई दूज तिथि समाप्त: 25 अक्टूबर 2025, सुबह 05:45 बजे
तिलक का शुभ मुहूर्त:
प्रातः 11:22 बजे से दोपहर 1:37 बजे तक (2 घंटे 15 मिनट)
यही वह अवधि है जब बहनें अपने भाई को तिलक कर सकती हैं और उसके दीर्घायु जीवन की कामना कर सकती हैं। इस विशेष समय में किया गया तिलक, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोगुना फलदायी माना गया है।
शिववास योग का महत्व:
इस बार भाई दूज पर शिववास योग बन रहा है, जो बहुत ही शुभ और दुर्लभ योगों में से एक माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब चंद्रमा वृष राशि में होता है और सूर्योदय के समय शिववास होता है, तो किया गया तिलक और पूजन अत्यंत फलदायी होता है।
शिववास योग में तिलक करने से:
भाई की उम्र लंबी होती है
जीवन में सुख-शांति बनी रहती है
रिश्तों में प्रेम और विश्वास मजबूत होता है
नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
भाई दूज का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व:
भाई दूज का पर्व यमराज और यमुनाजी की कथा पर आधारित है। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने उनके घर गए थे। यमुनाजी ने उन्हें तिलक किया और भोजन कराया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने वचन दिया कि जो बहन इस दिन अपने भाई को तिलक करेगी, उसके भाई को लंबी उम्र और सुख-समृद्धि प्राप्त होगी।
इस परंपरा को निभाते हुए आज भी बहनें भाई को तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और मिठाई खिलाकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके जीवन में खुशहाली की कामना करता है।
तिलक विधि और पूजन सामग्री:
तिलक करते समय आवश्यक सामग्री:
रोली या कुमकुम
चावल (अक्षत)
दीपक (घी का)
मिठाई (खासकर घर की बनी)
नारियल
फूल
आरती की थाली
तिलक की विधि:
सबसे पहले भाई को पूर्व दिशा की ओर बैठाएं।
बहनें थाली सजाकर दीप जलाएं।
रोली से तिलक करें, अक्षत चढ़ाएं।
नारियल अर्पित करें और मिठाई खिलाएं।
आरती उतारकर दीर्घायु और सफलता की कामना करें।
उपाय और परंपराएं:
इस दिन भाई को भोज कराना बहुत शुभ माना जाता है।
जिन लड़कियों के भाई नहीं हैं, वे चंद्रमा को तिलक कर सकती हैं।
भाई दूज पर यमराज और यमुनाजी की पूजा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
भाई दूज का यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को और भी मजबूत करने का एक सुंदर अवसर है। इस बार बन रहे शुभ योग और सीमित मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए बहनों को समय पर तिलक की तैयारी कर लेनी चाहिए। शिववास योग में किया गया तिलक न सिर्फ भाई के जीवन में सुख-शांति लाएगा, बल्कि रिश्ते में नई ऊर्जा और समर्पण भी जोड़ेगा।
भाई दूज की हार्दिक शुभकामनाएं!