Delhi दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ जारी नाकाबंदी अभियान के तहत अब तक 65 जहाजों का मार्ग बदला गया है। CENTCOM के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान तीन जहाजों को निष्क्रिय किया गया, जबकि दो जहाजों पर चढ़कर जांच की गई और नियमों के पालन को सुनिश्चित किया गया। अमेरिकी सेना की ओर से जारी जानकारी में कहा गया है कि समुद्री क्षेत्र में निगरानी अभियान लगातार जारी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य प्रतिबंधों और समुद्री नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। हालांकि, ईरान की ओर से इस तरह की कार्रवाइयों को लेकर पहले भी कड़ी प्रतिक्रिया दी जाती रही है।
CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी नौसेना और सहयोगी बल रणनीतिक समुद्री मार्गों पर गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध गतिविधियों में शामिल जहाजों की जांच की जा रही है और आवश्यक होने पर उन्हें रोका या दूसरे मार्ग पर भेजा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और सैन्य तनाव बना हुआ है। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद लगातार बढ़ते रहे हैं। समुद्री नाकाबंदी जैसे कदमों को इसी व्यापक रणनीतिक टकराव का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह अभियान अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चलाया जा रहा है। CENTCOM ने कहा कि समुद्री सुरक्षा बनाए रखना और अवैध गतिविधियों को रोकना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के आसपास समुद्री गतिविधियों में बढ़ोतरी से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर पड़ सकता है।
ईरान पहले भी अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव का विरोध करता रहा है। तेहरान का कहना है कि उसकी समुद्री गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में हैं और अमेरिका की एकतरफा कार्रवाइयां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। CENTCOM की ओर से जारी आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों और ईरान की प्रतिक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
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