New दिल्ली : केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विश्व व्यापार व्यवस्था में समानता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि भारत ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ यानी MFN ट्रीटमेंट को कुछ चुनिंदा शर्तों से जोड़ने का समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि MFN सिद्धांत का मूल उद्देश्य सभी व्यापारिक भागीदारों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना है।
पीयूष गोयल ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बैठक में भारत की ओर से रखे गए पक्ष की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान उन्होंने MFN सिद्धांत से जुड़े मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उनका कहना था कि विश्व व्यापार संगठन के कुछ सदस्यों द्वारा MFN ट्रीटमेंट को अपनी चुनी हुई शर्तों के आधार पर लागू करने की दिशा में बढ़ना इस सिद्धांत की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।
गोयल ने कहा कि MFN ट्रीटमेंट यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है कि सबसे छोटे व्यापारी को भी वही व्यापारिक शर्तें और अवसर मिलें, जो सबसे बड़े व्यापारी को उपलब्ध होते हैं। ऐसे में यदि इस व्यवस्था को अलग-अलग शर्तों से जोड़ दिया जाता है, तो वैश्विक व्यापार में समान अवसर उपलब्ध कराने का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने बैठक में इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसी देश या व्यापारी के आकार के आधार पर भेदभाव न हो। छोटे और विकासशील देशों के लिए यह सिद्धांत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक बाजार में उनकी भागीदारी को समान नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए ही मजबूत किया जा सकता है।
MFN विश्व व्यापार संगठन की व्यापार व्यवस्था के महत्वपूर्ण सिद्धांतों में शामिल है। इसके तहत किसी एक व्यापारिक भागीदार को दिए जाने वाले अनुकूल व्यवहार को सामान्य तौर पर अन्य पात्र सदस्यों तक भी पहुंचाने की अवधारणा है। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार में भेदभाव को कम करना और सभी सदस्यों के लिए अधिक समान परिस्थितियां तैयार करना है।
गोयल के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि भारत वैश्विक व्यापार व्यवस्था में ऐसे नियमों का पक्षधर है, जिनका इस्तेमाल सभी देशों के लिए समान रूप से किया जाए। भारत का जोर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े बुनियादी सिद्धांतों को ऐसी शर्तों के अधीन नहीं किया जाना चाहिए, जिनसे अलग-अलग सदस्यों के लिए अलग-अलग व्यवहार की स्थिति पैदा हो।
G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का एक प्रमुख मंच है। इसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि व्यापार नीतियों, आपूर्ति श्रृंखला, निवेश, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की चुनौतियों और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखते हैं। इसी मंच पर भारत ने MFN सिद्धांत को लेकर अपना पक्ष सामने रखा।
भारत लंबे समय से बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था में विकासशील देशों और छोटे व्यापारियों के हितों को महत्व देने की बात करता रहा है। गोयल ने भी अपने वक्तव्य में छोटे व्यापारियों का उदाहरण देते हुए इसी पहलू को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि MFN की व्यवस्था का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे छोटे और बड़े व्यापारियों के बीच नियमों के स्तर पर समानता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, यदि MFN ट्रीटमेंट को चुनिंदा शर्तों के साथ जोड़ा जाता है तो इससे उस समानता के सिद्धांत पर असर पड़ सकता है, जिस पर यह व्यवस्था आधारित है। भारत चाहता है कि वैश्विक व्यापार के नियम स्पष्ट, निष्पक्ष और सभी के लिए समान हों, ताकि किसी भी देश या कारोबारी समूह को अनुचित नुकसान का सामना न करना पड़े।
वैश्विक स्तर पर व्यापार से जुड़े नियमों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव और विभिन्न देशों की अलग-अलग व्यापार नीतियों के बीच WTO की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे समय में MFN जैसे बुनियादी सिद्धांतों के स्वरूप और उनके इस्तेमाल को लेकर होने वाली चर्चा का असर व्यापक अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था पर पड़ सकता है।
G20 बैठक में गोयल का बयान भारत के उस रुख को सामने रखता है, जिसमें बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के भीतर समान अवसर और गैर-भेदभाव को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि MFN ट्रीटमेंट को चुनिंदा शर्तों के आधार पर सीमित करने या उससे जोड़ने वाली व्यवस्था का वह समर्थन नहीं कर सकता।
गोयल ने अपने संदेश में छोटे व्यापारियों के हितों को केंद्र में रखते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियम ऐसे होने चाहिए, जिनमें सभी को समान अवसर मिलें। G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भारत की ओर से उठाया गया यह मुद्दा आने वाले समय में वैश्विक व्यापार नियमों और WTO से जुड़ी चर्चाओं में महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।
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