शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि के विरोध में सोमवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने विश्वविद्यालय गेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शुल्क वृद्धि का फैसला तत्काल वापस लेने की मांग उठाई। एसएफआई ने चेतावनी दी है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो पूरे प्रदेश में चरणबद्ध और उग्र आंदोलन किया जाएगा। एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सामान्य फीस, परीक्षा शुल्क, हॉस्टल शुल्क और विभिन्न प्रशासनिक मदों में की गई 25 प्रतिशत की वृद्धि को छात्र विरोधी और जनविरोधी करार देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना दूर-दराज और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण एच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन मौजूदा शुल्क वृद्धि का फैसला इस मूल उद्देश्य के विपरीत है।
एसएफआई कैंपस सचिव मुकेश कुमार और अध्यक्ष आशीष चौहान का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी वित्तीय चुनौतियों और बजटीय संकट का बोझ छात्रों पर डाल रहा है। एसएफआई का कहना है कि संगठन पहले भी प्रशासन को वैकल्पिक सुझावों के साथ ज्ञापन सौंप चुका है, लेकिन उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। एसएफआई विश्वविद्यालय इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि शैक्षणिक, परीक्षा, हॉस्टल व प्रशासनिक फीस में की गई 25 प्रतिशत वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। साथ ही पुनर्मूल्यांकन, थीसिस सबमिशन और डिग्री शुल्क में की गई बढ़ोतरी भी रद्द की जाए। संगठन ने राज्य सरकार से विश्वविद्यालय के वित्तीय संकट के समाधान के लिए विशेष वित्तीय पैकेज जारी करने और बजटीय प्रबंधन पर श्वेत पत्र सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। एसएफआई ने चेतावनी दी कि यदि फीस वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो संगठन पूरे राज्य में एक उग्र और चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। जिसके तहत परिसर के सभी विभागों में व्यापक हस्ताक्षर अभियान, कुलपति और कुलसचिव का घेराव, पुतला दहन करने, क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठने और पूरे समरहिल परिसर में कक्षाओं के पूर्ण बहिष्कार जैसे आंदोलन शुरू किए जाएंगे। संगठन ने कहा कि आवश्यकता पडऩे पर प्रदेश के सभी डिग्री कॉलेजों और संबद्ध संस्थानों को एकजुट कर राज्यव्यापी हिमाचल विश्वविद्यालय बंद का आह्वान भी किया जाएगा।