उदयपुर-किलाड़ मार्ग बना मौत का सफर, हर मोड़ पर मौत का डेरा

Update: 2026-07-26 12:09 GMT
Keylong. केलांग। लाहुल-स्पीति के उदयपुर-किलाड़ मार्ग पर शुक्रवार को हुआ दर्दनाक हादसा एक बार फिर कई अनसुलझे सवाल छोड़ गया है। कडूनाला के पास पहाड़ी से अचानक भारी मलबा गिरने से एक टैक्सी उसकी चपेट में आ गई और 13 लोगों की जान चली गई। इस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी वहीं खड़ा है कि आखिर इन दुर्गम पहाड़ी मार्गों पर लोगों की जान की कीमत कब समझी जाएगी। उदयपुर-किलाड़ सडक़ हिमाचल के सबसे जोखिम भरे मार्गों में गिनी जाती है। बरसात के मौसम में यहां पहाड़ दरकना, चट्टानों का गिरना और नालों का उफान सामान्य बात है। इसके बावजूद यही सडक़ पांगी घाटी के लोगों की जीवनरेखा है। रोजाना स्थानीय लोग, कर्मचारी, मरीज, विद्यार्थी और पर्यटक भी इसी रास्ते से सफर करने को मजबूर हैं। गर्मियों के मौसम में पांगी घाटी की सैर करने के लिए हजारों की संख्या में सैलानी पहुंचते है। जो कि पांगी से होकर ही आगे जम्मू -कश्मीर की और भी कई बार रुख करते है। मौसम खराब होने या सडक़ बंद होने की स्थिति में घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार जरूरी काम या चिकित्सा आपातकाल होने के बावजूद लोगों को मजबूरन सफर
करना पड़ता है।

रास्ते बीच में इतने संकरे हैं कि आमने-सामने अगर दो वाहन आए जाए तो पास देने के लिए कड़ी मशक्त करनी पड़ती है। इन दुर्गम मार्गों की सुरक्षा वैज्ञानिक निगरानी और आपदा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए ताकि पहाड़ों पर सफर करने वाला हर व्यक्ति सुरक्षित अपने घर लौट सके। क्योंकि सवाल आज भी वही है कि आखिर पहाड़ी मार्ग कब तक लोगों की निगलते रहेगे। रोजाना चलने वाले वाहन चालकों को हर मोड़ का पता है। लेकिन बरसात के दौरान जिस तरह से पहाड़ों से पत्थर गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। उस स्थिति में कव क्या हो जाए यह कोई नहीं जानता। स्थानीय लोग संतोष कुमारी, बीएस राणा, गणेश शासनी का कहना है कि हर वर्ष इस मार्ग पर छोटे-बड़े हादसे होते हैं। लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए जाते। संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपाय आधुनिक निगरानी प्रणाली, रॉक फॉल बैरियर,. समय पर चेतावनी व्यवस्था और सडक़ की मजबूती पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। किसी भी मौसम में कड़ूनाला से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं होता। कड़ूनाले के पास वाहन पहुंचते ही यहां सभी की सांसे थम जाती हैं। पहाड़ी से कम कोई पत्थर सामने आ जाए कोई नहीं जानता।
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