दुर्गा पूजा प्रीव्यू शो मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच कथित वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कोलकाता में पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता इंद्रनील सेन से जुड़े परिसरों समेत करीब 15 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई दुर्गा पूजा के ‘प्रीव्यू शो’ और उससे जुड़े कथित फंड घोटाले की जांच के सिलसिले में की गई है।
जांच का केंद्र ‘महानिर्वाण रोड मास आर्ट सोसाइटी’ नाम की एक संस्था बताई जा रही है। आरोप है कि संस्था ने दुर्गा पूजा से जुड़े विशेष प्रीव्यू कार्यक्रम आयोजित किए और खुद को यूनेस्को से जुड़ी या मान्यता प्राप्त संस्था के रूप में पेश किया। इसी आधार पर कार्यक्रमों और पास या टिकट की बिक्री के जरिए बड़ी रकम जुटाए जाने का आरोप है।
रिपोर्टों के मुताबिक इस पूरे मामले में कथित वित्तीय अनियमितता की रकम करीब 50 से 60 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। हालांकि यह जांच का विषय है और इस आंकड़े की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि संस्था के माध्यम से कितनी रकम जुटाई गई, उसका इस्तेमाल कहां हुआ और क्या किसी स्तर पर धनशोधन से जुड़ा लेन-देन हुआ।
ईडी की टीम ने सुबह से ही अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी शुरू की। इनमें इंद्रनील सेन से जुड़े परिसरों के अलावा उनके करीबियों और संस्था से संबंधित अन्य व्यक्तियों के ठिकाने शामिल बताए गए हैं। केंद्रीय एजेंसी का फोकस वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच पर है।
इस मामले की पृष्ठभूमि कुछ महीने पुरानी है। जून 2026 में कोलकाता पुलिस ने इंद्रनील सेन और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि महानिर्वाण रोड मास आर्ट सोसाइटी ने यूनेस्को से आधिकारिक संबंध होने का दावा किया और दुर्गा पूजा के दौरान इससे आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश की।
आरोपों के मुताबिक संस्था का गठन 2022 में किया गया था। इसके बाद दुर्गा पूजा से जुड़े कार्यक्रमों में यूनेस्को के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर प्रचार किया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके जरिए कई पूजा पंडालों के प्रीव्यू शो के नाम पर महंगे पास या टिकट बेचे गए। ईडी इसी वित्तीय प्रवाह और संस्था की गतिविधियों की जांच कर रही है।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि संस्था से इंद्रनील सेन की पत्नी मधुछंदा सेन का संबंध रहा है। जांच एजेंसियां संस्था के संचालन, उसके बैंक खातों, कार्यक्रमों से मिली आय और उस रकम के आगे हुए लेन-देन की जानकारी जुटा रही हैं। मामले में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
ईडी की कार्रवाई धन शोधन निवारण कानून यानी PMLA के तहत की जा रही है। एजेंसी का मकसद यह पता लगाना है कि यदि मूल अपराध से कोई अवैध कमाई हुई तो क्या उस रकम को अलग-अलग खातों या संस्थाओं के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई।
तलाशी के दौरान कुछ दस्तावेज और अन्य सामग्री जांच के लिए लिए जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि ईडी की ओर से अभी तक इस मामले में जब्त सामग्री की पूरी आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए बरामदगी से जुड़े दावों को जांच पूरी होने तक अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
इंद्रनील सेन पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके परिसरों से जुड़ी ईडी की कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। फिलहाल यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत या जांच के निष्कर्ष के आधार पर होगा।
दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव है। यूनेस्को ने 2021 में ‘Durga Puja in Kolkata’ को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया था। इसी वैश्विक पहचान के नाम के कथित इस्तेमाल को लेकर मौजूदा मामला संवेदनशील बन गया है।
जांच एजेंसियों का ध्यान इस बात पर भी है कि कहीं यूनेस्को की मान्यता का नाम इस्तेमाल कर लोगों या संस्थाओं से धन जुटाया तो नहीं गया। यदि ऐसा हुआ, तो उससे संबंधित भुगतान किसके खाते में गए और आगे रकम किस तरह इस्तेमाल हुई, यह जांच का अहम हिस्सा है।
ईडी की छापेमारी के बाद आने वाले दिनों में संस्था से जुड़े अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। साथ ही बैंक खातों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय दस्तावेजों की जांच के आधार पर एजेंसी आगे की कार्रवाई तय करेगी।
फिलहाल कोलकाता में कई ठिकानों पर तलाशी और जांच की कार्रवाई जारी रहने की खबर है। मामला अभी जांच के चरण में है और इंद्रनील सेन या अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। ईडी की जांच और आगे सामने आने वाले आधिकारिक दस्तावेजों से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं का वास्तविक दायरा कितना था।