नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में क्रूड ऑयल के दाम मजबूत हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति को माना जा रहा है। यह क्षेत्र दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में यहां तनाव बढ़ने पर
वैश्विक बाजार
में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ जाती है।
सप्लाई बाधित होने की आशंका
ऊर्जा बाजार में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर तनाव और बढ़ा तो तेल उत्पादन या परिवहन प्रभावित हो सकता है। प्रमुख समुद्री मार्गों से होने वाली सप्लाई में किसी तरह की बाधा आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। निवेशक इसी आशंका के कारण कच्चे तेल में खरीदारी बढ़ा रहे हैं, जिससे कीमतों को समर्थन मिल रहा है।
लगातार दूसरे सत्र में तेजी
क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की गई है। इससे पहले बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ था, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद तेल की कीमतों ने फिर तेजी पकड़ ली। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब मध्य पूर्व से आने वाले अगले घटनाक्रम पर है। अगर तनाव और गहराता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने पर देश के आयात बिल पर असर पड़ सकता है। लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने की स्थिति में पेट्रोलियम उत्पादों और परिवहन लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं।
निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर
तेल बाजार में फिलहाल भू-राजनीतिक घटनाक्रम सबसे बड़ा कारक बना हुआ है। निवेशक सप्लाई, उत्पादन और प्रमुख तेल उत्पादक देशों के फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है या और बढ़ता है। फिलहाल सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं ने कीमतों को समर्थन दिया है।
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