Keylong. केलांग। भारत सरकार के विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत देश के विभिन्न राज्यों से किन्नौर और लाहुल स्पीति के स्पीति घाटी के सीमावर्ती गांवों के भ्रमण पर आए युवाओं ने दूसरे चरण के दूसरे दिन की शुरुआत आईटीबीपी के सहयोग से काजा स्थित आईटीबीपी बेस कैंप के भ्रमण से हुई। यहां युवा प्रतिभागियों को देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात जवानों के जीवन, कर्तव्यों और चुनौतियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। आईटीबीपी अधिकारियों द्वारा हथियारों का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे प्रतिभागियों को सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला। प्रतिभागियों और जवानों के बीच एक मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच आयोजित किया गया। जिसने आपसी सहयोग, टीम भावना और सम्मान को बढ़ावा दिया। इसके बाद प्रतिभागियों ने डीएफओ स्पीति गोल्डी छाबड़ा के साथ एक ज्ञानवर्धक
संवाद में भाग लिया।


उन्होंने स्पीति क्षेत्र की विशिष्ट वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। इस सत्र में प्रतिभागियों को जैव विविधता संरक्षण तथा इस संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में सतत पर्यावरणीय प्रथाओं के महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया। प्रतिभागियों ने लालुंग गांव सहित प्रसिद्ध कीह मॉनेस्ट्री का भ्रमण भी किया, जो स्पीति क्षेत्र के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण बौद्ध मठों में से एक है। इस भ्रमण ने उन्हें स्पीति घाटी की समृद्ध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को निकट से जानने और अनुभव करने का अवसर प्रदान किया। इसके उपरांत युवाओं ने भव्य चिचम पुल का भी भ्रमण कियाए जो एशिया के सबसे ऊंचे सस्पेंशन पुलों में से एक है। गहरी खाई के ऊपर बना यह पुल और चारों ओर फैले पर्वतों के मनमोहक दृश्य युवाओं के लिए अत्यंत रोमांचकारी और प्रेरणादायक रहे। इस अनुभव ने युवाओं में रोमांच और उत्साह का विशेष रंग भर दिया। इस कार्यक्रम के दौरान 21 युवा प्रतिभागियों का यह दल स्पीति के सीमावर्ती गांवों जिसमें गियू, हुरलिंग, लालुंग और काजा खास शामिल है।
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