शिमला। मनरेगा में बदलाव के विरोध में हिमाचल सरकार ने ऐतिहासिक रिज मैदान पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष दो घंटे का उपवास रखा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री समेत मंत्रिमंडल के सदस्य विधायकों व अन्य नेताओं के साथ उपवास पर बैठे, जबकि हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल और प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार भी इसमें शामिल हुई। शुक्रवार सुबह 11 बजे से एक बजे तक यह उपवास रहा। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत रोजगार के अवसर पंचायतों द्वारा पैदा किए जाते थे। उन अवसरों को समाप्त कर दिया गया है। पहले पंचायत प्रधान योजना बनाता था और गांवों में कच्ची सडक़ें बनाने के लिए मनरेगा का सदुरूपयोग करता था। साथ ही गांव के बेरोजगारों के साथ-साथ महिलाओं को भी रोजगार के अवसर पैदा करता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में देश में रोजगार के अवसर पैदा करने वाली इकलौती योजना मनरेगा थी। जिसे भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया है।
सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा सरकार ने योजना का नाम ही नहीं बदला, बल्कि इसकी आत्मा को भी पूरी तरह से खत्म कर दी है। उन्होंने कहा कि अब पंचायत प्रधानों और सचिव के हाथों में वह शक्तियां नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि जिस समय यह बिल पास हुआ, तो यह विश्व ऐसा बिल था, जहां घरद्वार पास दो किलोमीटर के दायरे में रोजगार के अवसर पैदा करने पड़ेंगे और अवसर पैदा ना होने की सूरत में बेरोजगारी भता दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की योजना पिछले बीस वर्षो से चल रही थी। सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार घर पर ही मनरेगा में काम कर परिवार का पेट पालने वाले युवा बेरोजगारों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ कुठाराघात किया है और उनके पेट पर लात मारी है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना में सौ फीसदी भारत सरकार से मिल रहा था और अब उसमें नब्बे-दस की कंडीशन लगा दी गई है। वहीं हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा कि एआईसीसी के आदेशों के तहत यह आंदोलन चल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले संसद सत्र हुआ उसमें मनरेगा को खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी का सपना था, जिसमें हर गरीब को काम देने का आश्वासन दिया था और मिल भी रहा था।