शिरगुल महाराज की छड़ी यात्रा के साथ गेलियों बिशु मेला शुरू

Update: 2026-05-29 12:01 GMT
Nohradhar. नौहराधार। आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के संगम का प्रतीक तीन दिवसीय शिरगुल महाराज गेलियों बिशु मेला गुरुवार को भव्य छड़ी यात्रा के साथ शुरू हो गया। मेले का शुभारंभ सेवानिवृत्त सैनिक अशोक ठाकुर ने किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मेले हमारी समृद्ध लोक संस्कृति और सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर रखने का आह्वान किया। श्रद्धालु उत्साह के साथ छड़ी यात्रा में शामिल हुए और शिरगुल महाराज के जयकारों से पूरा नौहराधार क्षेत्र गूंज उठा। सुबह करीब नौ बजे मेला कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सबसे पहले मंदिर में
पूजा-अर्चना की गई।


इसके बाद शिरगुल महाराज से विधिवत रूप से बिशु मेले के शुभारंभ की अनुमति मांगी गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवता की स्वीकृति मिलने के बाद मेले का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर देवामानल और देवना की पवित्र छडिय़ों को श्रद्धालुओं ने अपने कंधों पर उठाया। मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने छडिय़ों का फूल मालाओं और जयकारों के साथ जोरदार स्वागत किया। पूरे क्षेत्र में ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज सुनाई देती रही। गौरतलब है कि गेलियों बिशु मेला तीन पंचायतों का सांझा पारंपरिक मेला है, जिसे क्षेत्रवासी वर्षों से मिल-जुल कर मनाते आ रहे हैं। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और भाईचारे का भी प्रतीक माना जाता है। इस बिशू मेले में स्थानीय लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। इसके अलावा मेलार्थियों ने वॉलीबॉल व कबड्डी प्रतियोगिता का भी आनंद लिया।
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