न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार को CJI सूर्यकांत की फटकार
बड़ी खबर.
नई दिल्ली: SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट ने जमकर नाराजगी जाहिर की है। अदालत का कहना है कि इस घटना की सभी नेताओं को एक सुर में निंदा करनी चाहिए। साथ ही भारत निर्वाचन आयोग को राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती संबंधी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा शीर्ष न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने घटना पर राज्य सरकार और अधिकारियों से कड़े सवाल किए हैं। मालदा जिले में बुधवार शाम 3 महिला जजों समेत 7 अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह घटना पश्चिम बंगाल सरकार और उसके अधिकारियों की तरफ से मुंह मोड़ने जैसा था।
सीजेआई ने राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता से कहा कि पश्चिम बंगाल में सभी 'राजनीतिक की भाषा' बोलते हैं। यह सबसे ज्यादा ध्रुवीकरण वाला राज्य है।
कोर्ट ने कहा, 'यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की एक निडर कोशिश है, बल्कि यह इस अदालत के अधिकार को भी चुनौती देती है। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि ऐसा लगता है कि यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और बचे हुए मामलों में आपत्ति सुलझाने की चल रही प्रक्रिया को रोकने के लिए सोची-समझी और इरादतन की गई कार्रवाई थी।'
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, 'हम किसी को भी कानून हाथ में लेने या न्यायिक अधिकारियों के दिमाग पर मनोवैज्ञानिक हमला करने की अनुमति नहीं देंगे... यह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अपनी जिम्मेदारी से भागने जैसा भी है। अधिकारियों को यह कारण बताना होगा कि सूचना मिलने के बाद भी उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकालना क्यों सुनिश्चित नहीं किया।'