Shimla. शिमला। लंबा मानसून सत्र बुलाने का मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का फैसला सही साबित हुआ। इन 12 बैठकों में सदन की कार्यवाही करीब 60 घंटे चली, जिसमें सभी विधायक उनके क्षेत्रों में हुए नुकसान को सरकार तक पहुंचा पाए। मुख्यमंत्री सुक्खू ने मानसून सत्र के पहले ही दिन भाजपा की ओर से लाए गए काम रोको को प्रस्ताव को स्वीकृति देकर विपक्ष को भी चौंका दिया था। इसी प्रस्ताव पर लगातार चार दिन विधायकों को अपनी बात रखने का मौका मिला। बाद में मानसून सत्र को तीन दिन आगे बढ़ाने की बात कहकर विपक्ष को हैरान किया। इस मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री अपने कैबिनेट मंत्रियों की ढाल बने रहे। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान को तब बचाया, जब उन्होंने प्राकृतिक आपदा को लेकर यह कह दिया था कि आसमान थोड़े फट गया है।
सीएम राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के सम्मान में भी सदन के भीतर अड़े रहे और उनका पूरा साथ दिया। हालांकि विपक्षी दल ने वर्तमान सत्र के लिए उनका बहिष्कार कर रखा था। नौकरियों के मुद्दे पर शालीनता से विपक्ष का सामना करने के अलावा राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी स्पष्ट संकेत मुख्यमंत्री ने सदन में दिए। उन्होंने कहा है कि पंजाब सरकार से शानन बिजली प्रोजेक्ट वापस लेने को लेकर सितंबर महीने में सुनवाई है। बीबीएमबी के एरियर को लेकर भी सितंबर के महीने में ही सुप्रीम कोर्ट से फैसला आ सकता है। एनएचपीसी से बैरा स्यूल प्रोजेक्ट को वापस लेने को लेकर राज्य सरकार अपील में जा रही है। मानसून सत्र की समाप्ति पर मिडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा ?कि सदन की कार्यवाही लगभग 60 घंटे तक चली। इस तरह सत्र की उत्पादकता 98 प्रतिशत रही। मंगलवार को ही विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के दौरान कुल 690 प्रश्नों की सूचनाओं पर सरकार द्वारा उत्तर उपलब्ध करवाए गए।