व्हाट्सएप बैन मांग पर शशि थरूर ने जीता दिल

Update: 2026-07-26 12:11 GMT

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपनी बेबाक बातों, शानदार शब्दों और हाजिरजवाबी के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार भी उन्होंने अपने अनोखे अंदाज से सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। हालांकि इस बार मामला किसी राजनीतिक बयान या बहस से जुड़ा नहीं था, बल्कि उनके बेटे ईशान थरूर की एक सोशल मीडिया पोस्ट का था। ईशान ने मजाकिया अंदाज में व्हाट्सएप पर 'बूमर्स' को बैन करने की बात कही, जिस पर शशि थरूर ने भी उसी अंदाज में जवाब देकर इंटरनेट पर चर्चा छेड़ दी।

पूरा मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शुरू हुआ। जोहो के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ श्रीधर वेंबू ने छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का सुझाव दिया था। उन्होंने बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया की बढ़ती लत से दूर रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि बच्चों को किताबें पढ़ने, बाहर खेलने और वास्तविक दुनिया से जुड़ने के ज्यादा अवसर मिलने चाहिए।

श्रीधर वेंबू के इस विचार पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। इसी चर्चा में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि वह इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए। हालांकि इसके साथ उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि भारत को किसी और कदम से पहले व्हाट्सएप पर बूमर्स को बैन करने की जरूरत है।

ईशान के इस पोस्ट पर शशि थरूर ने तुरंत जवाब दिया और अपने खास अंदाज में बेटे की बात का जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि अगर भारत में जन्म लेने वाली पीढ़ियों के पैटर्न को देखा जाए तो पश्चिमी देशों के मुकाबले यहां हर पीढ़ी में काफी समानता है और मजेदार बात यह है कि तुम्हारी पीढ़ी भी बूमर की श्रेणी में आ सकती है।

शशि थरूर का यह जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोगों ने उनके ह्यूमर और शब्दों के इस्तेमाल की जमकर तारीफ की। कई यूजर्स ने कहा कि थरूर का जवाब उनके राजनीतिक भाषणों की तरह ही प्रभावशाली और मजेदार था। वहीं कुछ लोगों ने पिता-पुत्र के बीच इस हल्के-फुल्के संवाद को सोशल मीडिया की सकारात्मक बातचीत का उदाहरण बताया।

दरअसल, 'बूमर' शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर बेबी बूमर पीढ़ी के लिए किया जाता है। आधिकारिक रूप से बेबी बूमर उन लोगों को कहा जाता है, जिनका जन्म द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1946 से 1964 के बीच हुआ था। हालांकि इंटरनेट और सोशल मीडिया की भाषा में यह शब्द अक्सर बुजुर्ग या पारंपरिक सोच रखने वाले लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो नई पीढ़ी के विचारों से अलग राय रखते हैं।

भारत में सोशल मीडिया पर 'बूमर' शब्द का इस्तेमाल अक्सर उन लोगों के लिए किया जाता है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पुराने विचारों, लंबी सलाह या बिना मांगी गई राय साझा करते हैं। इसी संदर्भ में ईशान थरूर ने मजाकिया अंदाज में व्हाट्सएप पर बूमर्स को बैन करने की बात कही थी।

यह बहस फ्रांस की एक पहल के बाद शुरू हुई थी। फ्रांस ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। वहां कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की दिशा में नियम बनाए गए हैं। श्रीधर वेंबू ने इसी का उदाहरण देते हुए भारत में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचार करने की बात कही थी।

हालांकि इस मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। कुछ लोगों ने बच्चों को स्क्रीन की लत से बचाने के लिए ऐसे कदमों का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों का मानना था कि सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय बच्चों को डिजिटल दुनिया के सही इस्तेमाल की शिक्षा दी जानी चाहिए।

शशि थरूर और ईशान थरूर के बीच हुई यह छोटी सी सोशल मीडिया बातचीत अब चर्चा का विषय बन गई है। जहां एक ओर यह पिता-पुत्र के बीच मजाकिया संवाद दिखाती है, वहीं दूसरी ओर यह नई और पुरानी पीढ़ी के बीच सोच के अंतर को भी सामने लाती है।

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