चेन्नई : मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को तिरुपत्तूर विधानसभा सीट से जुड़े चुनाव विवाद में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने DMK उम्मीदवार केआर पेरियाकरुप्पन की ओर से दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें TVK विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी।आर श्रीनिवास सेतुपति ने तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र से बेहद करीबी मुकाबले में सिर्फ एक वोट के अंतर से जीत हासिल की थी। DMK उम्मीदवार ने इस जीत को चुनौती देते हुए चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था।
कोर्ट ने सेतुपति की याचिका को दी मंजूरी
मामले की सुनवाई जस्टिस जीके इलनथिरायन की पीठ ने की। अदालत ने TVK विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति की ओर से दायर आवेदन को स्वीकार करते हुए DMK उम्मीदवार की चुनाव याचिका को खारिज कर दिया।यह आदेश सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर VII नियम 11 के तहत दिया गया।इस नियम के तहत अगर किसी याचिका में कानूनी कार्रवाई के लिए जरूरी आधार या तथ्य मौजूद नहीं होते हैं, तो अदालत उसे शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर सकती है।
चुनाव याचिका में पर्याप्त आधार नहीं होने की बात
हाई कोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिका में रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 के तहत कार्रवाई के लिए जरूरी तथ्यों को पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया था।अदालत ने माना कि केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाली ठोस अनियमितता का विवरण और प्रमाण भी जरूरी होता है।कोर्ट के अनुसार, याचिका में ऐसे तथ्य नहीं थे जिनसे यह साबित हो सके कि कथित गड़बड़ी का चुनाव परिणाम पर निर्णायक प्रभाव पड़ा।
पोस्टल बैलेट और वोट गिनती को लेकर लगाए गए थे आरोप
DMK उम्मीदवार केआर पेरियाकरुप्पन ने अपनी चुनाव याचिका में पोस्टल बैलेट से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ पोस्टल बैलेट गलत दिशा में चले गए और वोटों की गिनती में भी अनियमितता हुई।इसके अलावा पोस्टल बैलेट की दोबारा जांच नहीं करने को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी।
कोर्ट ने आरोपों को माना अपर्याप्त
हाई कोर्ट ने इन आरोपों पर विचार करते हुए कहा कि पोस्टल बैलेट से संबंधित दावों और मतगणना में कथित गड़बड़ी से यह साबित नहीं होता कि चुनाव परिणाम पर इसका कोई बड़ा प्रभाव पड़ा।अदालत ने कहा कि चुनाव रद्द करने या किसी उम्मीदवार के निर्वाचन को चुनौती देने के लिए केवल संदेह या सामान्य आरोप पर्याप्त नहीं हो सकते।इसके लिए स्पष्ट और ठोस आधार जरूरी होता है।
एक वोट से हुई थी जीत
तिरुपत्तूर विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम काफी करीबी रहा था। TVK विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति ने केवल एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी।इतने कम अंतर वाली जीत के कारण यह चुनाव परिणाम चर्चा में आया था और DMK उम्मीदवार ने इसे अदालत में चुनौती दी थी।
चुनावी मामलों में कानूनी प्रक्रिया का महत्व
चुनावी याचिकाओं में अदालतें यह देखती हैं कि क्या चुनाव प्रक्रिया में हुई किसी कथित अनियमितता ने वास्तव में परिणाम को प्रभावित किया है।किसी भी चुनाव को चुनौती देने के लिए रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के तहत निर्धारित कानूनी मानकों को पूरा करना जरूरी होता है।
TVK विधायक को मिली राहत
हाई कोर्ट के फैसले के बाद आर श्रीनिवास सेतुपति का निर्वाचन बरकरार रहेगा।अदालत के फैसले से TVK विधायक को बड़ी राहत मिली है, जबकि DMK उम्मीदवार की ओर से दायर चुनाव चुनौती समाप्त हो गई है।
आगे की स्थिति
मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद तिरुपत्तूर विधानसभा सीट को लेकर चल रहा कानूनी विवाद खत्म हो गया है।फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए मजबूत कानूनी आधार और ठोस तथ्य जरूरी होते हैं। केवल कथित अनियमितताओं के आरोप चुनाव को अमान्य घोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।