शशि थरूर ने 'वंदे मातरम संशोधन' पर उठाए सवाल, बोले-क्या 12 मिनट तक खड़े रहेंगे लोग?
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'वंदे मातरम संशोधन' को लेकर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब हर सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत और अंत में राष्ट्रीय गान के साथ-साथ पूरे राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को गाना अनिवार्य होगा।
शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, "राष्ट्रपति ने संसद में बिना किसी चर्चा के पास हुए वंदे मातरम संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के तहत, किसी भी सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत को भी पूरा गाना जरूरी होगा।"
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा कि वह दोनों का बहुत सम्मान करते हैं और पहले दो पद गा भी सकते हैं लेकिन बाकी चार पद अब तक कभी अनिवार्य नहीं थे। उन्होंने एक व्यावहारिक दिक्कत की ओर ध्यान दिलाया।
उन्होंने लिखा, "जन गण मन के दौरान दर्शकों से उम्मीद की जाती है कि वे सम्मान के साथ खड़े हों और पूरे 52 सेकंड तक अपना ध्यान इस पर केंद्रित रखें। राष्ट्रगीत को पूरा गाने में 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है। तमिलनाडु ने हाल ही में फैसला किया है कि इन दोनों से पहले तमिल भाषा में राज्य गीत गाया जाएगा, जिसमें 2 मिनट और लगेंगे। क्या हम सच में उम्मीद करते हैं कि दर्शक हर कार्यक्रम से पहले और बाद में छह मिनट तक (यानी कुल 12 अतिरिक्त मिनट) सम्मान के साथ और बिना हिले-डुले खड़े रहेंगे? क्या सम्मान और धैर्य को कानून के जरिए लागू किया जा सकता है?"
शशि थरूर ने कहा, "मुझे डर है कि राष्ट्रीय गीत के प्रति ज्यादा सम्मान बढ़ाने का जो मकसद इस बिल का है, वह पूरा नहीं होगा बल्कि इसका उलटा भी हो सकता है।" बता दें कि संसद ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित किया है। यह संशोधन भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' के तहत इसे राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' के बराबर दर्जा देता है।
नए नियम के तहत अब किसी भी सरकारी समारोह की शुरुआत और अंत में राष्ट्रीय गान के अलावा पूरे 'वंदे मातरम' को गाना होगा। तमिलनाडु ने पहले ही तय किया है कि इन दोनों से पहले 2 मिनट का राज्य गीत भी गाया जाएगा।