शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा। संगठन ने विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही, प्रशासनिक सुधार और उच्च शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग की। एसएफआई ने आरोप लगाया किविश्वविद्यालय आर्थिक संकट का हवाला देकर लगातार विद्यार्थियों पर फीस वृद्धि का बोझ डाल रहा है। संगठन का कहना है कि विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालने से पहले सार्वजनिक धन के उपयोग और वित्तीय प्रबंधन की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। ज्ञापन में निजी एवं सरकारी महाविद्यालयों के निरीक्षण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने तथा विभागाध्यक्षों की नियुक्तियों में समान नीति लागू करने की मांग भी उठाई गई।
संगठन ने कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस), शिक्षकों की नियुक्तियों और पदोन्नतियों में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग दोहराई। एसएफआई ने वर्ष 2020 के बाद हुई करीब 186 शिक्षकों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाते हुए उनकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इसके अलावा विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों, ईआरपी परियोजना और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया में संभावित वित्तीय एवं तकनीकी अनियमितताओं की जांच कराने की भी मांग की गई। एसएफआई ने हिमाचल में प्रत्यक्ष चुनाव बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सभी मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। संगठन ने मुख्यमंत्री से शीघ्र कार्रवाई का आग्रह किया और कहा कि वह भविष्य में भी विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक और शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।