नई दिल्ली: पाकिस्तान के आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अचानक पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री यानी POF पहुंचे. यहां उन्होंने हथियार और गोला-बारूद के प्रोडक्शन का जायजा लिया. साथ ही दो नए इंडस्ट्रियल प्लांट भी देखे, जिनमें साल के अंत तक काम शुरू होने की उम्मीद है. यह दौरा सिर्फ एक फैक्ट्री विजिट नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की पूरी डिफेंस स्ट्रैटेजी में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है. यह पूरा मामला सऊदी अरबिया, तुर्किए और चीन से जुड़े कनेक्शन के साथ भारत के लिए भी अहम बन जाता है.
POF पाकिस्तान की सबसे बड़ी डिफेंस फैसिलिटीज में गिनी जाती है. मुनीर को यहां लोकल स्तर पर बनाए गए हथियारों और गोला-बारूद के टेस्ट भी दिखाए गए. पाकिस्तान की मिलिट्री मीडिया विंग ISPR ने खास तौर पर बताया कि इस दौरे में सेल्फ रिलायंस और नई टेक्नोलॉजी पर जोर दिया गया. यानी पाकिस्तान अब विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करके अपने देश में ही हथियार बनाने की क्षमता बढ़ाना चाहता है.
इसके अलावा POF को प्राइवेट कंपनियों से जोड़ने की योजना पर भी बात हुई. पाकिस्तान का डिफेंस मंत्रालय इस साल निवेशकों, कंपनियों और यूनिवर्सिटी को साथ लाकर हथियारों का एक्सपोर्ट बढ़ाने पर भी काम कर रहा है. मतलब साफ है कि पाकिस्तान अब सिर्फ हथियार खरीदना नहीं, बल्कि खुद हथियार बनाकर बेचना भी चाहता है.
लेकिन असली कहानी यहीं खत्म नहीं होती. पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान की डिफेंस डिप्लोमेसी में भी बड़ा बदलाव आया है. अगस्त महीने में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौता हुआ है. इस समझौते की खास बात यह है कि अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे बाकी देशों पर हमला माना जाएगा.
पाकिस्तान ने कहा है कि यह समझौता पूरी तरह डिफेंसिव है और किसी खास देश के खिलाफ नहीं है. फिर भी इसका असर बड़ा माना जा रहा है, क्योंकि सऊदी अरब की आर्थिक ताकत, तुर्की की डिफेंस टेक्नोलॉजी और पाकिस्तान की मिलिट्री तथा न्यूक्लियर क्षमता मिलकर एक नया गठबंधन बना सकती हैं.
इसमें एक और अहम एंगल चीन का भी है. पाकिस्तान लंबे समय से चीन का करीबी डिफेंस पार्टनर रहा है. अगर पाकिस्तान अपने हथियार बनाने की क्षमता बढ़ाता है, तुर्किए से टेक्नोलॉजी लेता है और सऊदी अरब से आर्थिक मदद हासिल करता है, तो इससे चीन, तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा सहयोग का एक बड़ा नेटवर्क तैयार हो सकता है. इसीलिए मुनीर के इस दौरे को अकेली घटना की तरह नहीं, बल्कि पाकिस्तान की बड़ी रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए.
भारत के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि 2025 के सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है. अगस्त 2026 में पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े दावों पर फिर तीखी प्रतिक्रिया दी. वहीं भारत के पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान की टिप्पणियों से भी 2025 के टकराव और किराना हिल्स को लेकर नई बहस छिड़ी है. ऐसे माहौल में पाकिस्तान का अपनी हथियार बनाने की क्षमता पर जोर देना भारत के लिए नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाता है.
पाकिस्तान की सरकारी लाइन यही है कि उसके नए क्षेत्रीय समझौते पूरी तरह डिफेंसिव हैं. लेकिन मुनीर का फैक्ट्री दौरा, नए प्लांट, स्वदेशी हथियार, सऊदी तुर्की समझौता और चीन से पुरानी पार्टनरशिप, ये सारी बातें मिलकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि पाकिस्तान अपनी सैन्य मशीन को किस दिशा में तैयार कर रहा है.
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