MUMBAI मुंबई। महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम में लगी टीपू सुल्तान की तस्वीर को लेकर विवाद बढ़ गया है। नगर निगम प्रशासन की ओर से तस्वीर हटाने का आदेश दिए जाने के बाद समाजवादी पार्टी की डिप्टी मेयर ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। मामला मालेगांव नगर निगम कार्यालय में लगी एक तस्वीर से जुड़ा है। यह तस्वीर महात्मा गांधी, छत्रपति शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. बीआर अंबेडकर, सावित्रीबाई फुले, महात्मा ज्योतिराव फुले, भगत सिंह और राजर्षि शाहू महाराज जैसी ऐतिहासिक हस्तियों की तस्वीरों के साथ लगाई गई थी।
नगर निगम के नेता नीलेश काकड़े ने टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद नगर निगम प्रशासन और पुलिस की ओर से तस्वीर हटाने के निर्देश दिए गए। मामला महाराष्ट्र सरकार के मंत्री दादा भूसे तक भी पहुंचा था। इसके बाद समाजवादी पार्टी की डिप्टी मेयर ने इस आदेश को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि अगर अन्य ऐतिहासिक व्यक्तियों की तस्वीरें सरकारी परिसर में लगी हैं, तो केवल टीपू सुल्तान की तस्वीर को लेकर ही आपत्ति क्यों जताई जा रही है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सरकारी कार्यालयों में तस्वीरें लगाने से संबंधित नियमों और दिशा-निर्देशों का हवाला दिया जा रहा है। वकील ने पूछा कि इन नियमों के तहत किन-किन ऐतिहासिक व्यक्तियों की तस्वीरें लगाई जा सकती हैं और किसी एक व्यक्ति की तस्वीर को लेकर अलग रुख क्यों अपनाया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय नेताओं और महापुरुषों की तस्वीरें लगाने से जुड़े 1965 के सर्कुलर और 2002 में जारी सरकारी प्रस्तावों का हवाला दिया गया है।
टीपू सुल्तान 18वीं शताब्दी में मैसूर के शासक थे और उनके ऐतिहासिक योगदान व विरासत को लेकर अलग-अलग मत रहे हैं। कुछ लोग उन्हें औपनिवेशिक शक्तियों के खिलाफ संघर्ष करने वाले शासक के रूप में देखते हैं, जबकि कुछ समूह उनके शासन से जुड़े कुछ पहलुओं पर आपत्ति जताते हैं। फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया में है और बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया जा रहा है। अदालत के निर्णय के बाद ही तस्वीर हटाने या लगाए रखने को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
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